Palamu Fraud Case: झारखंड के पलामू जिले में खाद की डीलरशिप दिलाने, पॉलीहाउस निर्माण कराने और पौधारोपण में सहयोग देने के नाम पर 18 लोगों से करीब 76.97 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि मेदिनीनगर के बेरिया इलाके से संचालित कंपनी के संचालक कार्यालय बंद कर फरार हो गए हैं। इस मामले में पलामू के हुसैनाबाद, हैदरनगर और पड़वा के अलावा बिहार के औरंगाबाद क्षेत्र के लोग भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। पीड़ितों की शिकायत के आधार पर मेदिनीनगर टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
खाद की डीलरशिप और पॉलीहाउस का दिया गया भरोसा
जानकारी के अनुसार, मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र के बेरिया इलाके में रासायनिक और जैविक खाद के कारोबार के नाम पर कंपनी संचालित की जा रही थी। कंपनी के प्रतिनिधियों ने झारखंड और बिहार के विभिन्न इलाकों के लोगों से संपर्क किया। आरोप है कि लोगों को खाद की डीलरशिप दिलाने, पॉलीहाउस का निर्माण कराने और पौधारोपण से जुड़े कार्यों में सहयोग देने का भरोसा दिया गया। इन प्रस्तावों के आधार पर अलग-अलग लोगों से रकम ली गई। बाद में संबंधित काम नहीं होने और कंपनी का कार्यालय बंद मिलने के बाद लोगों को कथित ठगी का संदेह हुआ।
भुगतान के लिए दिए गए चेक हुए बाउंस
पीड़ितों के अनुसार, कंपनी की ओर से कुछ लोगों को रकम लौटाने के लिए चेक भी दिए गए थे। हालांकि, बैंक में जमा करने पर चेक बाउंस हो गए। इसके बाद पीड़ितों को अपने साथ धोखाधड़ी होने की आशंका हुई। लोगों का आरोप है कि जब उन्होंने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, तब तक कार्यालय बंद हो चुका था और संबंधित लोग वहां से जा चुके थे। इसके बाद पीड़ितों ने अपनी रकम वापस दिलाने के लिए पुलिस से शिकायत की।
हैदरनगर निवासी ने दर्ज कराई प्राथमिकी
मेदिनीनगर टाउन थाना प्रभारी ज्योतिलाल रजवार के अनुसार, पीड़ितों के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि मामले में अलग-अलग लोगों से अलग-अलग रकम लिए जाने की बात सामने आई है। हैदरनगर निवासी इकबाल सिद्दीकी ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। फिलहाल मामले में कथित ठगी की पूरी प्रक्रिया और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
झारखंड और बिहार के पीड़ितों को रकम वापसी का इंतजार
इस मामले में पलामू और बिहार के औरंगाबाद क्षेत्र के लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। पीड़ित अपनी रकम वापस पाने की उम्मीद में पुलिस से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस जांच के बाद ही कथित ठगी से जुड़े सभी तथ्यों, रकम के लेन-देन और आरोपियों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


















