Bihar Khet Bachao Abhiyan: बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को कृषि भवन स्थित अपने कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘खेत बचाओ अभियान’ पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने भी भाग लिया। इस दौरान विजय कुमार सिन्हा ने मृदा संरक्षण, जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेतों का संरक्षण, किसानों की समृद्धि और टिकाऊ कृषि बिहार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
मृदा स्वास्थ्य और किसानों की समृद्धि पर जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की समृद्धि के दृष्टिकोण के अनुरूप बिहार में खेत बचाओ अभियान को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जल प्रबंधन और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करके कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध किसान और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था सुनिश्चित करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
7,275 किसान चौपालों में 6.19 लाख से अधिक किसानों को किया जागरूक
विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, बिहार में 1 जून से 30 जून तक खेत बचाओ अभियान चलाया गया था। इस दौरान राज्यभर में 7,275 किसान चौपालों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से 6,19,436 किसानों को जागरूक किया गया। इन चौपालों के जरिए किसानों तक वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया।
26 अक्टूबर से 30 नवंबर तक फिर चलेगा अभियान
कृषि मंत्री ने बताया कि बिहार में आगामी 26 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रस्तावित खेत बचाओ अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ संचालित किया जाएगा। इस दौरान किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संरक्षण और पोषक तत्वों के सतत प्रबंधन के बारे में जागरूक किया जाएगा। अभियान में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय कर्मियों के बीच समन्वय मजबूत करने पर भी जोर रहेगा।
जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की तैयारी
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कृषि को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए वर्षा जल संचयन, खेतों में नमी बनाए रखने, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन और दलहनी फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों और विभागीय कृषि प्रसार तंत्र के माध्यम से किसानों तक आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी पहुंचाई जाएगी। इन उपायों का उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, जल संसाधनों का संरक्षण करना और कृषि उत्पादन की स्थिरता को बढ़ावा देना है।
‘खेत सुरक्षित, समृद्ध किसान, खुशहाल बिहार’
कृषि मंत्री ने कहा कि खेती केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और जीवन का आधार है। उनके अनुसार, खेतों, मिट्टी और जल संसाधनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी जरूरी है। उन्होंने अभियान का संदेश देते हुए कहा, “खेत सुरक्षित, समृद्ध किसान, खुशहाल बिहार।” साथ ही ‘सेव लैंड, सेव लाइफ’ के संकल्प के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने पर बल दिया।


















