Jamui Farmer Success Story ,पटना:बिहार के जमुई जिले के कर्णपुर पंचायत निवासी 55 वर्षीय किसान चंद्रिका मंडल ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया है। खेती पर निर्भर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने मशरूम और सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। कृषि विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और मशरूम झोपड़ी योजना से मिले सहयोग ने उनके इस प्रयास को आगे बढ़ाने में मदद की। चंद्रिका मंडल के मुताबिक, पहले खेती में पुरानी तकनीकों, पानी की कमी, सूखे और कम बारिश के कारण लगातार नुकसान उठाना पड़ता था। आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाने के बाद मशरूम और सब्जी उत्पादन से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
आत्मा के प्रशिक्षण से मिली आधुनिक खेती की जानकारी
चंद्रिका मंडल ने बताया कि उनके गांव में बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय से जुड़ी आत्मा (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण) के माध्यम से किसान सभा आयोजित की गई थी। उन्होंने इसमें हिस्सा लिया और कृषि से जुड़ी विभिन्न योजनाओं तथा आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण और किसान सभा के दौरान मशरूम की खेती, आधुनिक तरीके से सब्जी उत्पादन, केला की खेती, संरक्षित खेती, शुष्क बागवानी, धान-मक्का-गेहूं की खेती, बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। इसके अलावा कृषक समूहों, स्वयं सहायता समूहों, किसान पाठशाला, कृषक गोष्ठी, प्रशिक्षण और कृषि परिभ्रमण कार्यक्रमों के बारे में भी बताया गया।
पुरानी खेती में नुकसान के बाद अपनाया मशरूम उत्पादन
किसान चंद्रिका मंडल के अनुसार, पुराने कृषि तरीकों और सिंचाई की समस्या के कारण उनकी खेती प्रभावित होती थी। कम वर्षा और सूखे की स्थिति में फसलों से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था। इसी दौरान आत्मा के प्रखंड स्तरीय तकनीकी अधिकारियों और उद्यान विभाग के कर्मियों ने उनके गांव का दौरा किया। अधिकारियों से संपर्क के बाद उन्हें उद्यान निदेशालय की मशरूम झोपड़ी योजना का लाभ मिला। इसके बाद उन्होंने मशरूम की खेती पर ध्यान देना शुरू किया और बेहतर उत्पादन के लिए प्रशिक्षण तथा परिभ्रमण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
मशरूम और सब्जी उत्पादन से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार
चंद्रिका मंडल ने बताया कि मशरूम की खेती शुरू करने के बाद प्रखंड तकनीकी प्रबंधक-सह-प्रखंड उद्यान पदाधिकारी और सहायक तकनीकी प्रबंधक समय-समय पर खेतों का निरीक्षण करते थे। तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से उन्हें खेती के नए तरीकों को समझने में सहायता मिली। मशरूम के साथ सब्जियों का उत्पादन भी उनके लिए आय का महत्वपूर्ण माध्यम बना। किसान के अनुसार, इन गतिविधियों से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और खेती के प्रति उनका भरोसा बढ़ा।
सरकारी कृषि योजनाओं को किसान ने दिया सफलता का श्रेय
चंद्रिका मंडल ने अपनी प्रगति का श्रेय बिहार सरकार की कृषि और उद्यान संबंधी योजनाओं, प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहयोग को दिया। उनका अनुभव बताता है कि किसानों को आधुनिक तकनीक, समय पर मार्गदर्शन और उपयुक्त योजनाओं का लाभ मिले तो वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नए विकल्प अपना सकते हैं। मशरूम और सब्जी उत्पादन के जरिए चंद्रिका मंडल ने अपने गांव में आधुनिक खेती की संभावनाओं का उदाहरण पेश किया है। हालांकि, उनकी वास्तविक आय और मुनाफे के आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, लेकिन उनके मुताबिक खेती के इन तरीकों से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है।
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