बिहार Nadi Sanjeevani Project के तहत नदियों से निकाली गई गाद को राजमार्ग निर्माण में उपयोग किया जाएगा, जिससे बाढ़ नियंत्रण और विकास दोनों संभव होंगे।
Google पर 22Scope चुनेंBihar Nadi Sanjeevani Project, पटना: बिहार में नदियों में जमा गाद (सिल्ट) को अब विकास कार्यों में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच ‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम के तहत समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल के तहत नदियों और अन्य जलस्रोतों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी और उससे प्राप्त सामग्री का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों तथा अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य नदियों की जलधारण क्षमता और जलप्रवाह में सुधार के साथ सड़क निर्माण के लिए वैकल्पिक सामग्री उपलब्ध कराना है। इस समझौते के तहत 16 चालू राजमार्ग परियोजनाओं में 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे बिहार की प्राकृतिक चुनौतियों को विकास के अवसर में बदलने वाली पहल बताया और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया।
बिहार की गाद से बनेंगी सड़कें, 16 परियोजनाओं को मिलेगा फायदा
‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम के तहत नदियों से निकाली गई गाद को सड़क निर्माण की वैकल्पिक सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को जहां भी इस सामग्री की जरूरत होगी, वहां बिहार सरकार नियमानुसार खनन लाइसेंस उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी। इससे गाद को बेकार जमा पदार्थ के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। इस समझौते के तहत 16 चालू राजमार्ग परियोजनाओं में कुल 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद के उपयोग का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार, इससे प्राकृतिक ऊपरी मिट्टी यानी टॉपसॉइल के दोहन को कम करने में भी मदद मिल सकती है। गाद के वैज्ञानिक प्रबंधन से सड़क निर्माण और जलस्रोतों के पुनरुद्धार को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
बिहार में लागू हुई देश की पहली गाद प्रबंधन नीति
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने जलस्रोतों के पुनरुद्धार और गाद प्रबंधन के लिए अपनी अलग नीति बनाई है। बिहार जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 के माध्यम से नदियों और दूसरे जलस्रोतों में जमा सिल्ट का बेहतर तरीके से प्रबंधन किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, बिहार में नेपाल से आने वाले पानी और दूसरे राज्यों से आने वाले जलप्रवाह के कारण हर साल बाढ़ की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा गंगा नदी में गाद जमा होने की समस्या भी गंभीर है। उन्होंने फरक्का बैराज का उल्लेख करते हुए कहा कि नदियों से गाद हटाने और जलस्रोतों का पुनरुद्धार करने से जलप्रवाह तथा जलधारण क्षमता में सुधार हो सकता है। इससे बाढ़ के प्रभाव को कम करने और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नितिन गडकरी ने बताया बुलढाणा मॉडल पर होगा काम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ‘नदी संजीवनी’ के तहत महाराष्ट्र के सफल बुलढाणा मॉडल की तर्ज पर बिहार में नदियों से गाद हटाने का काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर बिहार सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। गाद का उपयोग सड़क निर्माण में होने से जल संरक्षण और आधारभूत संरचना के विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकेगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 58,340 करोड़ रुपये के निवेश से NHAI की 39 परियोजनाएं, कुल 1,561 किलोमीटर लंबाई में, निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा 1,85,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 11 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनकी कुल लंबाई 1,982 किलोमीटर बताई गई है। राज्य की विभिन्न नदियों पर क्षेत्रीय संपर्क बेहतर करने के लिए 29 नए पुलों का निर्माण भी जारी है।
गंगा के पानी और दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गंगा के जल उपयोग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार बांग्लादेश को पानी दिए जाने का विरोधी नहीं है, लेकिन राज्य की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में बिहार को जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर यानी चार महीने ही गंगाजल के उपयोग का अवसर मिलता है। उन्होंने कृषि, उद्योग और पेयजल की आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से गंगा नदी के दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क निर्माण कराने का आग्रह भी किया। उनका कहना था कि बेहतर सड़क संपर्क और आधारभूत ढांचे के विस्तार से राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
एक लाख एकड़ नई जमीन और 12 टाउनशिप की योजना
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नदियों से गाद निकाले जाने के बाद लगभग एक लाख एकड़ नई भूमि उपलब्ध हो सकती है। इस भूमि पर मुंबई और दिल्ली की तर्ज पर ‘गंगा फेसिंग’ कॉलोनियां और आवास विकसित करने की संभावना जताई गई। उन्होंने बताया कि बिहार में करीब 80 हजार एकड़ भूमि पर 12 नए टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इनमें पटना में पाटलिपुत्र, गया में मगध, मुंगेर में अंग, भागलपुर में विक्रमशिला, सहरसा में कोसी, दरभंगा में मिथिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और मां सीता की जन्मस्थली पर सीतापुरम शामिल हैं। इसके साथ ही राज्य में 10 नए एयरपोर्ट और 32 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की दिशा में भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन परियोजनाओं में भी नदियों से निकाली गई गाद का उपयोग किया जा सकेगा। कार्यक्रम में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, NHAI के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव, बिहार पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, मंत्रालय के संयुक्त सचिव उदित अग्रवाल और NHAI के सदस्य (परियोजनाएं) अनिल चौधरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
Bihar Nadi Sanjeevani Project क्या है?
यह परियोजना नदियों और जलस्रोतों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालकर उसे राष्ट्रीय राजमार्गों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में उपयोग करने की योजना है। इससे नदियों की जलधारण क्षमता में सुधार होगा और बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
इस परियोजना में कितनी गाद का उपयोग किया जाएगा?
इस समझौते के तहत 16 चालू राजमार्ग परियोजनाओं में कुल 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद के उपयोग का लक्ष्य रखा गया है।
क्या इस परियोजना से बिहार सरकार पर कोई वित्तीय भार पड़ेगा?
नहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इस परियोजना पर बिहार सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
बिहार ने गाद प्रबंधन के लिए क्या किया है?
बिहार देश का पहला राज्य बन गया है जिसने बिहार जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 बनाई है।
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