मेला की सुरक्षा में भारी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती
रांची : दो साल बाद रथ यात्रा और इसके साथ लगनेवाले मेला की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं.
एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा के अनुसार रथयात्रा के दौरान मंदिर परिसर में
मेले में एक हजार से अधिक महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों तथा 12 से अधिक दंडाधिकारी की तैनाती की गयी है.
14 जगहों पर बैरिकेडिंग की गयी है. जगह-जगह पर सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन कैमरे से निगरानी रखी जायेगी.
निगरानी के लिए वॉच टावर भी बनाये गये हैं. अस्थायी कंट्रोल रूम भी बनाया गया है.
ये है ट्रैफिक रूट
जगन्नाथपुर रथ मेला के लिए ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है.
एचईसी विधानसभा की ओर से आनेवाले वाहन शहीद मैदान से शालीमार मार्केट होते हुए प्रभात तारा मैदान,
जेएससीए स्टेडियम से दाहिने मुड़ कर रिंग रोड की ओर जा सकेंगे.
वहीं रिंग रोड की तरफ से आनेवाले वाहन तिरिल मोड़ से जेएससीए स्टेडियम, प्रभात तारा मैदान, शालीमार मार्केट होते हुए शहर की ओर जायेंगे. मेन रोड से पुराना विधानसभा की तरफ से मेला जाना हो वैसे बड़ी वाहन अथवा मिनीडोर को शहीद मैदान के पास पार्क करेंगे. 13 स्थानों पर बनाये गये ड्रॉप गेट पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती भी की गयी है.

10 साल बाद नये रथ पर सवार होंगे भगवान जगन्नाथ
धुर्वा स्थित जगन्नाथपुर मंदिर से 10 साल बाद नये रथ पर भगवान जगन्नाथ सवार होंगे. इसका निर्माण 45 दिनों में किया गया है. पुरी से आये कारीगरों ने इस रथ का निर्माण किया है. रथ पर पीतल का कलश और नीलचक्र लगाया गया है. लगभग 40 लाख रुपए की लागत से नया रथ तैयार हुआ है. रथ पर लगनेवाला कपड़ा पुरी से मंगाया गया है. आज इसी रथ पर सवार होकर भगवान आज मौसीबाड़ी जायेंगे.
एकांतवास से बाहर आये भगवान जगन्नाथ
15 दिनों बाद एकांतवास से बाहर आये भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन पाकर भक्त भावविभोर हो उठे. यहां दोपहर से भगवान जगन्नाथ समेत तीनों विग्रहों के नेत्रदान की तैयारी शुरू कर दी गयी थी.
आज प्रातः चार बजे हुई पूजा
रथयात्रा के दिन शुक्रवार को प्रातः चार बजे भगवान की पूजा-अर्चना की गयी. इसके बाद श्रृंगार और आरती र भगवान को भोग लगाया गया. इसके बाद पट आम भक्तों के लिए खोल दिया गया. दोपहर 12 बजे अन्न भोग लगेगा और दो बजे पट बंद हो जायेगा.
मिठाई और पकवानों की सजी दुकान
कोरोना के कारण दो साल बाद यहां मेला लगा है. यहां मिठाई से लेकर पकवान तक दुकान सज चुकी है. जिसे लोगों में उत्साह है. यहां तरह-तरह के झूले लगाये गये हैं. वहीं, रोजमर्रा के सामान क दुकानें सजी हैं. दुकानों में मछली मारने की बंसी, कुमनी व जाल के अलावा लकड़ी व पत्थर के समान, बच्चों के खिलौने, साड़ी, छाता आदि उपलब्ध है.
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