Palamu: नोटिस के बाद भी नहीं आये DGP और CS, उपाध्यक्ष अरुण हलधर ने उठाये सवाल

उपाध्यक्ष अरुण हलधर ने महादलित परिवार का जाना हाल, कहा- बेघर कर देना सही नहीं

पलामू : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष अरुण हलधर ने पलामू जिले के पांडू में

पीड़ित महादलित परिवार से मिलकर ज़मीनी हकीकत जानी. मेदिनीनगर के परिसदन भवन में

प्रेस वार्ता में अरुण हलधर ने कहा कि जबरन घर को उजाड़कर बेघर कर देना कतई सही नहीं है.

इन सभी महादलित परिवारों को उसी स्थान पर बसाया जायेगा. महादलितों को हर संभव मदद की जायेगी.

पलामू नहीं पहुंचे DGP और CS

उन्होंने कहा कि सूचना देने के बाद डीजीपी, मुख्य सचिव का पलामू नहीं आना कई सवाल खड़े करता है.

उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुरुमातू से जबरन मुसहरों को हटाया जा रहा था तो

सूचना मिलने के बाद भी पुलिस और प्रशासन ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?

अगर प्रशासन चाहता तो इसको रोका जा सकता था.

अरुण हलधर ने डीसी और एसपी से ली घटना की जानकारी

इससे पहले उपाध्यक्ष अरुण हलधर पांडु के मुरुमातु गांव पहुंचे.

जहां महादलित परिवार पर घटित घटना स्थल का निरीक्षण किया.

इस दौरान पलामू उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक भी मौजूद रहे और उनसे घटना से संबंधित जानकारी ली.

उन्होंने कहा पूर्व में सरकारी भूमि थी, वर्तमान में यह भूमि किसके नाम पर है. इसकी हमलोग जांच कर रहे हैं.

राष्ट्रीय स्तर का बना मामला- अरुण हलधर

प्रेस वार्ता में अरुण हलधर ने कहा कि पांडू में घटी घटना से हम सभी काफी आहत हैं.

ये मामला राष्ट्रीय स्तर का मामला बन चुका है. पूरे देश भर में इस घटना को लेकर दुख प्रकट कर रहे हैं. जबरन घर को उजाड़कर बेघर कर देना ये कतई सही नहीं है. इस मामले को लेकर हम सब महादलित परिवारों से मिले और समस्या सुनी. किसी राजनीतिक मुद्दे बनाने को लेकर मैं पलामू नहीं आया हूं. इस मामले को संज्ञान में लेकर उन्हें उनका अधिकार दिलाने आया हूं. इस मामले में हमने जिला प्रशासन से बात की तो उन्होंने कहा की ये जमीन का पेपर इनलोगो के पास नहीं है और जिन्होंने मदरसा बनाने का दावा कर रहे हैं. उनके पास जमीन का कागज है. महादलित परिवारों को कोई स्थान देखकर बसाने की तैयारी जिला प्रशासन कर रही है.

अरुण हलधर बोले- कोर्ट बताएगी ये जमीन किसका है

अरुण हलधर ने कहा कि इसपर हमने उन्हें बताया कि जमीन किसका है, ये आप और हम निधारित करने वाले नहीं है. ये कोर्ट बताएगी की जमीन किसका है. घटना होने के पूर्व अगर जिला प्रशासन ऐसा करती तो कोई परेशानी नहीं थी. मगर घटना होने के बाद लीपापोती का काम न करे. वर्तमान में महादलितों का आधार कार्ड उसी स्थान के पते पर बनाएं. और इस मामले में आयोग अपने अंदर ले ली है. अब आयोग के संज्ञान में मामला आ चुका है. इन सभी महादलित परिवारों को उसी स्थान पर बसाया जायेगा. महादलितों को हर संभव मदद किया जायेगा.

रिपोर्ट: शशि

Saffrn

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