मां ब्रह्मचारिणी की ऐसे करें पूजा, मिलेगी सुख-समृद्धि

रांची : आज नवरात्रि 2022 का दूसरा दिन है. आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सुख-समृद्धि मिलेगी और सभी कामों में सफलता प्राप्त होगी.

‘ब्रह्म’ शब्द का अर्थ तपस्या से है और ‘ब्रह्मचारिणी’ का अर्थ है- तप का आचरण करने वाली.

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने वाले व्यक्ति को अपने हर कार्य में जीत हासिल होती है.

वह सर्वत्र विजयी होती है. सफेद वस्त्र धारण किए हुए मां ब्रह्मचारिणी के

दो हाथों में से दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल है.

इनकी पूजा करने से व्यक्ति के अंदर जप-तप की शक्ति बढ़ती है.

जानिए मां ब्रह्मचारिणी की कैसे करें पूजा और मंत्र.

ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

सुबह के समय उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि करके साफ-सुथरे वस्त्र पहन लें.

इसके बाद मां दुर्गा का मनन करें. अगर आपके कलश की स्थापना की है,

तो उसकी पूजा विधिवत तरीके से करें. इसके बाद मां दुर्गा और उनके स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें.

सबसे पहले मां को जल अर्पित करें. इसके बाद फूल, माला, रोली, सिंदूर चढ़ा दें.

फिर एक पान में सुपारी, लौंग, इलायची, बताशा और सिक्का रखकर चढ़ा दें.

फिर भोग में मिठाई आदि खिला दें. इसके बाद घी का दीपक और धूप बत्ती जला दें

और दुर्गा चालीसा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.

इसके बाद हाथ में एक फूल लेकर मां का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जाप करें.

अंत में फूल मां के चरणों में अर्पित कर दें और विधिवत तरीके से आरती कर लें.

इन शुभ मुहूर्त में करें पूजा-

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:36 एएम से 05:24 एएम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:48 एएम से 12:36 पीएम
  • विजय मुहूर्त- 02:12 पीएम से 03:00 पीएम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:00 पीएम से 06:24 पीएम
  • अमृत काल- 11:51 पीएम से 01:27 एएम, 28 सितम्बर
  • निशिता मुहूर्त- 11:48 पीएम से 12:36 एएम, 28 सितम्बर
  • द्विपुष्कर योग- 06:16 एएम से 02:28 एएम, 28 सितम्बर
ये है श्लोक मंत्र-

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

ये है ध्यान मंत्र-

वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्.
जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥

कैसा पड़ा मां दुर्गा का ब्रह्मचारिणी नाम

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पार्वती के रूप में पर्वतराज के घर में पुत्री के रूप में हुआ था. भगवान शिव से शादी के लिए नारद जी ने मां पार्वती को व्रत रखने की सलाह दी थी. भगवान शिव को पाने के लिए देवी मां ने निर्जला, निराहार होकर कठोर तपस्या की थी. हजारों साल तपस्या करने के बाद ही मां पार्वती को तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है.

कैसा है मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप

मां दुर्गा के दूसरे अवतार मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की बात करें,

तो उन्होंने दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है.

देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप है यानी तपस्या का मूर्तिमान रूप है.

मां ब्रह्मचारिणी का भोग

दुर्गा मां को नवरात्रि के दूसरे दिन चीनी का भोग लगाना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से दीर्घायु का आशीष मिलता है. मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दूध से बने व्यंजन जरूर अर्पित करें.

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