Jamtara- कोबरा पकड़ने की ट्रेनिंग –
जिस कोबरा को देखकर लोगों के पैर के नीचे की जमीन खिसक जाती है,
उनके सांस फूलने लगते हैं, लोग इधर-उधर भागने लगते हैं.
उसी कोबरा को पकड़ने की ट्रेनिंग वन कर्मियों को दी गई.
पच्छिम बंगाल से आये प्रशिक्षकों के द्वारा वन कर्मियों को कोबरा पकड़ने के आधुनिक गुर सिखायें.
वन्यकर्मियों को मिला कोबरा पकड़ने की ट्रेनिंग
इस दौरान प्रशिक्षकों ने अपने साथ लाए दो कोबरा को वन कार्यलय में छोड़ दिया
और उसके बाद वन कर्मियों को पकड़ने का प्रशिक्षण देने लगें.
सांप को पकड़ते वक्त वन कर्मियों की हालत देखने लायक थी, वह काफी भयभीत नजर आ रहे थें,
लेकिन प्रशिक्षकों के द्वारा उन्हे उत्साहित किया जा रहा था,
उनमें हिम्मत पैदा करने की कोशिश की जा रही थी.
डीएफओ ने भी लिया ट्रेनिंग
प्रशिक्षकों ने सामान्य वन कर्मियों के साथ ही डीएफओ को भी रेस्क्यू करने का प्रशिक्षण प्राप्त किया.
मौके पर सोसायटी फॉर नेचर कंजर्वेशन एंड इंगेजमेंट संस्था के विशाल सदरा ने बताया
कि उनके द्वारा आम लोगों को भी सांप पकड़ने का प्रशिक्षण दिया जाता है.
मनुष्य के जीवन में सांप का विशेष महत्व है,
लेकिन जानकारी के अभाव में सांप को मार दिया जाता है. यह किसानों का मित्र भी है.
क्यों जरूरी है सांपों का संरक्षण
भारत में पाए जाने वाले सांपों में 20 प्रतिशत ही जहरीले होते हैं, बाकी 80 प्रतिशत जहरीले नहीं होते हैं.
सांपों को बचाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ये प्रकृति के भोजन चक्र का सबसे अहम हिस्सा हैं, पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
यहां बतला दें कि जामताड़ा को सांपों का घर माना जाता है.
झारखंड में सबसे ज्यादा सांप जामताड़ा में ही पाया जाता है.
4 साल के मासूम को डसने के बाद तड़प-तड़प कर मर गया कोबरा
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