साहिबगंजः पलक झपकते बिजली का भारी भरकम ट्रांसफार्मर नदी में समा रहा है, कभी सोना उगलने वाली रत्नगर्भा धरती गंगा की धारा में विलीन हो रही है, बर्बादी और तबाही का यह मंजर साहिबगंज के रज्जाक टोले की है. लगता है कि गंगा की मचलती धारा यहां सब कुछ मिटाने की जीद पर अड़ गई है, गाँव-गलियाँ सब कुछ देखते ही देखते गंगा में विलीन हो रही है, अच्छी खासी पक्की सड़क पलक झपकते ही टुकड़े-टुकड़े होकर गंगा में समाहित हो रही.

गाँव से मकान दर मकान गायब होते जा रहे हैं, जिस गंगा की धारा से लाए गए उपजाऊ मिट्टी की वजह से यह धरती कभी रत्नगर्भा कहलाती थी, सोना उगलती थी, आज उसी गंगा की गर्जना से किसानों में सिहरन पैदा हो रही है. बर्बादी का यह ख़ौफ़नाक मंजर देखकर साहिबगंज के ग्रामीण और किसान कांप रहे है. नदी किनारे बसे मकानों की बुनियाद हिल रही है, टुकड़े-टुकड़े हो गंगा में समा रहे है. लोगों की बरसों की बसी-बसाई जिन्दगी तबाह हो रही है.

लेकिन दुर्भाग्य यह है कि प्रशासन गहरी निंद सो रहा है. ग्रामीण सरकारी मदद की आस लगाए इंतजार में एक-एक पल किसी तरह काट रहे है. विधायक अनंत कुमार ओझा और जिला प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल पा रही है.
रिपोर्टः अमन


















