महाबोधि संस्कृति केंद्र में अहिल्याबाई होल्कर की मनायी गई जयंती समारोह, राज्यपाल भी रहे मौजूद

बोधगया : बोधगया महाबोधि संस्कृति केंद्र में अहिल्याबाई होलकर की त्रिशताब्दी 300वीं जयंती मनाई गई। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर शामिल हुए। वहीं कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर एवं अहिल्याबाई होलकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर शुरू किया गया। वहीं अहिल्याबाई होलकर के जीवनी पर भी व्याख्यान किया गया।

महोत्सव के अवसर पर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि माता अहिल्याबाई होलकर ने जमीन से जोड़ने का काम किया। क्या शिक्षा नीति होनी बताएगी हमारा वास्तव अहिल्याबाई से नाता क्या है कैसे होना चाहिए। स्वर्ण जागरण की आवश्यकता है ऐसे ही में माता अहिल्याबाई हमारे आदर्श हैं। माता अहिल्याबाई होलकर का व्याख्यान देश में पहली बार हो रहा है खास करके बिहार से पहली बार शुरुआत हो रहा है आप इसके साक्षी है। विष्णुपद मंदिर का जिर्णोद्धार माता अहिल्याबाई होलकर के द्वारा किया गया, काशी विश्वनाथ विश्वविद्यालय जन्उदार किया। ऐसे में उनके व्याख्यान की आवश्यकता थी मुझे लगा कि इनका व्याख्यान करना जरूरी है, तब मैंने यह कार्यक्रम रखा है। माता अहिल्याबाई होलकर हमारे लिए आदर्श हैं, बिहार में पहली बार ऐसे आयोजन किया गया। देश में पहली बार हो रहा है उन्होंने राज्य प्रकार चला किस प्रकार से चलाया समाज को केंद्रों में रखकर के उन्हें समाज उच्च स्थान खड़ा करने की आवश्यकता है।

Governor of Bihar 2 22Scope News

राज्यपाल ने अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशताब्दी जयंती महोत्सव पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अहिल्याबाई होल्कर का पूरा जीवन समाज के कल्याण के लिए समर्पित था और वे वास्तव में लोकमाता थीं। उनका जीवन हमारे लिए आदर्श है। ऐसी नारियों का जीवन चरित्र समाज के सामने आना चाहिए ताकि लोग उनसे प्रेरित होकर समाज व राष्ट्र के हित में कार्य कर सकें।

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राज्यपाल ने अहिल्याबाई होल्कर के कृतित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने समाज और धर्म के उत्थान, संस्कृति के संवर्द्धन और हमारी परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का तात्पर्य देश के सर्वांगीण विकास से है और @2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ऐसी नारियों का योगदान आवश्यक है। आज का यह अमृतकाल स्व के जागरण का काल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 हमारे बच्चों को जमीन से जोड़ने वाली नीति है और यह इसमें उपयोगी है।

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आशीष कुमार की रिपोर्ट

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