डिजिटल डेस्क : वक्फ संशोधन विधेयक को अखिलेश यादव ने बताया – नाकामियों का बिल…। वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पर लोकसभा में बुधवार को हुई चर्चा में भाग लेते हुए सपा (समाजवादी पार्टी) प्रमुख अखिलेश यादव ने न केवल मोदी सरकार को जमकर घेरा बल्कि पेश विधेयक को लेकर कहा कि – ‘…ये नाकामियों का बिल है।’
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पेश विधेयक पर मोदी सरकार और भाजपा को घेरने के क्रम में सपा मुखिया अखिलेश यादव चुन-चुनकर बिंदुवार मसलों का उल्लेख करते हुए वार किया। अखिलेश यादव ने कहा कि – ‘…सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ये बिल ला रही है। उसकी नजर वक्फ की जमीन पर है। ये नाकामियों का बिल है।
…ये देश सबको साथ लेकर चला है। अभी कुछ दिन पहले ईद थी। इस बार पता नहीं क्या वजह थी पांबदी लगी थी? मंत्री जी को ये बताना चाहिए। भाजपा जब भी कोई नया बिल लाती है तो वो अपनी नाकामी छिपाती है।’
अखिलेश बोले- सियासी हठ है वक्फ बिल
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा में अपने संबोधन के दौरान पूरे रौ में दिखे।
सरकार पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि – ‘…मैं कहता हूं नाकामियों का पर्दा इस बार वक्फ बिल बना है। …वक्फ बिल सियासी हठ है, सांप्रदायिक राजनीति का नया रूप है।
…भाजपा बिल से अपने समर्थकों का तुष्टीकरण करना चाहती है जो बेरोजगारी और महंगाई से उससे छिटक गए हैं। …भाजपा की नजर वक्फ की जमीनों पर है। वह पिछले दरवाजे से ये जमीनें अपने लोगों को देना चाहती है।
भाजपा का लक्ष्य ही ये है कि ध्रुवीकरण हो। …वो जानते हें इसका लाभ उठाने में वो आगे रहेंगे। …ज्यादातर पार्टियों विरोध में हैं लेकिन भाजपा बिल क्यों लाना चाहती है ? भाजपा असत्य बात कहती है।
…जब से वोट में गिरावट आई है तब से भाजपा वोट को संभालने की कोशिश में जुटी है। वक्फ की जमीनों पर उसकी नजर है। …ये अपने लोगों को जमीनें देना चाहती है। वोट बैंक को संभालने के लिए इस बिल का लाया जा रहा है।
…इससे पहले जो बिल लाए गए, क्या उससे देश में कोई बदलाव आया? भाजपा मुस्लिमों में भी बंटवारा चाहती है। इस बिल से वो ऐसा करना चाहती है। वक्फ बिल के पीछे ना नीति सही, ना नियत सही।
…भाजपा ध्रुवीकरण का फायदा उठानी चाहती है। भाजपा मुस्लिम भाईचारे को बांटना चाहती है। भाजपा को अपने वोटबैंक में गिरावट की चिंता है।’

महाकुंभ में हुई मौतों पर पर्दा डालने को लाए वक्फ बिल…
अखिलेश यादव इतने पर ही नहीं रुके और इसी क्रम में महाकुंभ का भी विस्तार से जिक्र करते हुए मोदी सरकार को घेरा।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि – ‘…भाजपा ने महाकुंभ को लेकर बड़े-बड़े दावे किए। लोगों की जान गई वहां पर। …वो अपनी नाकामी छिपा रही है। कुंभ में जिनकी जान गई सरकार उनके बारे में बताए। …जो 1 हजार हिंदू गायब हुए हैं उनके बारे में सरकार बताए।
…महाकुंभ में कितने हिंदू मारे गए ? इस पर पर्दा डालने के लिए भाजपा यह बिल लेकर आई है। …महाकुंभ में आस्था सबकी है। कोई पहली बार कुंभ नहीं हो रहा था। भाजपा ने ऐसा प्रचार किया कि 144 साल बाद यह कुंभ हो रहा है।
….सरकार का दावा था कि हमारी तैयारी सौ करोड़ श्रद्धालुओं की है, महाकुंभ में 30 श्रद्धालु मारे गए, और एक हजार लापता हैं। सरकार द्वारा जान गंवाने वालों के नाम बताए जाएं। कुंभ हमारे लिए कारोबार का जरिए नहीं है।
…महाकुंभ की मौतों पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। …मैं भाजपा की सोच के बारे में बता रहा हूं। धर्म की चीजों से कारोबार नहीं हो सकता है। …कुंभ क्या कारोबार की जगह है?’

अखिलेश बोले – वक्फ बिल पर मुसलमानों की नहीं सुनी जा रही…
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि – ‘…वक्फ बिल मुसलमानों के लिए है। मुसलमानों की बात ही नहीं सुन रहे। …वक्फ बिल के जरिए मुसलमानों के अधिकारों की छीना जा रहा है। …बिल के पीछे ना तो नीयत सही है और ना ही नीति।
…भाजपा अलोकत्रांतिक पार्टी है। …मैं ये पूछना चाहता हूं कि ये बिल अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने बनाया कि किसी और विभाग ने बनाया है? यह बिल कहां से आया?
…आज देश में अल्पसंख्यकों की हालत ऐसी हो गई है कि आज सरकार को उनके धर्म का प्रमाण पत्र देना पड़ेगा? …क्या वे दूसरे धर्मों से प्रमाण पत्र मांगेंगे कि आपने पांच साल पूरे किए हैं या नहीं? …इस बिल में ऐसा क्यों पूछा जा रहा है?
सरकार धर्म के इस मामले में क्यों दखल दे रही है…? वक्फ बिल नाकामी पर पर्दा है। भाजपा सरकार हर मोर्चे पर नाकाम। …रातोंरात नोटबंदी का फैसला लिया। नोटबंदी की नाकामी पर भी चर्चा जरूरी है। महंगाई, बेरोजगारी और किसान की आय दोगुनी नहीं कर पाए, उस पर भी चर्चा होनी चाहिए।

…इस सरकार ने नोटबंदी का भी फैसला लिया था लेकिन आज भी कितनी जगहों से नोट निकल रहे हैं। नाकामी किसानों को लेकर भी है। महंगाई को लेकर भी है। …गंगा यमुना साफ हो गई? …स्मार्ट सिटी बन गई? …गोद लिए गांव क्या गोद से उतार दिए?
…मैं कहता हूं नाकामियों का पर्दा इस बार वक्फ बिल बना है। जिसके लिए बिल बना है, उसकी बात को कहने न देना भी नाइंसाफी है। …जिसके लिए फैसला होना है उनकी बात को भी अहमियत नहीं दी गई।
…ये देश सबको साथ लेकर चला है। क्या डिफेंस, रेलवे की जमीन नहीं बेची जा रही है? वक्फ भी भारत का है इसलिए कहीं न कहीं वक्फ की जमीन से बड़ा मुद्दा वो जमीन है, जिस पर चीन ने अपने गांव बसा लिए।
…चीन के कब्जे वाली जमीन ज्यादा बड़ा मुद्दा है। चीन ने जिस जमीन पर गांव बसाए वो बड़ा मुद्दा है। …लेकिन कोई बात न करे इसलिए ये बिल ला रहे हैं।’