1971 की लड़ाई में अलबर्ट एक्का ने दिखया था अदम्य साहस

रांची: भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 1971 की लड़ाई में अलबर्ट एक्का ने अदम्य साहस दिखाते हुए पाकिस्तान में घुस कर बंकर नष्ट करते हुए दुश्मनों को मार गिराया था.

गुमला जिले के जनजातीय बहुल जारी गांव में जन्में अलबर्ट एक्का ने इस युद्ध में पाकिस्तानी सौनिकों को रोकने के लिए अकेले दौड़ते हुए टॉप टावर पर चढ़ गये. और टॉप टावर के मशीनगन को अपने कब्जे में लेकर दुश्मनों को तहस-नहस कर दिया था इस दौरान उन्हें 20 से 25 गोलियां लगी थी.

पूरा शरीर गोलियों से छलनी था. टॉप टावर से नीचे गिर कर उनकी मौत हुई थी.उन्हें मरणोंपरांत देश का सर्वश्रेष्ठ सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था.

आज अलबर्ट एक्का का शहादत दिवस तीन दिसंबर को है।गुमला जिले के जनजातीय बहुल जारी गांव के निवासी थे। इस गावं में 1942 में जुलियस एक्का व मरियम एक्का के परिवार में अलबर्ट एक्का का जन्म हुआ था.

अलबर्ट ने प्रारंभिक पढ़ाई गांव के ही सीसी पतराटोली व मिडिल स्कूल की पढ़ाई भीखमपुर से की, घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण वे आगे की पढ़ाई नहीं कर सके.

पिता के साथ खेती-बारी कर वह अपना जिवन यापन कर रहें थे। इस दौरान अलबर्ट ने दो वर्षों तक नौकरी की तलाश की. लेकिन उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिली. इसके बाद वे भारतीय सेना में शामिल हुए. 20 वर्ष की उम्र में अलबर्ट ने 1962 में चीन के विरुद्ध युद्ध में अपनी बुद्धि व बहादुरी का लोहा मनवाया था.

इसके बाद 1968 में बलमदीना एक्का से उनका विवाह हुआ.बलमदीना से शादी के बाद 1969 में एक पुत्र हुआ, जिसका नाम विंसेंट एक्का है. अलबर्ट एक्का 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लिये, जहां दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे.

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