नमन नवनीत
गिरिडीह: सदर अस्पताल में डायलिसिस सेवा बंद होने से नाराज मरीजों ने सड़क जाम कर दिया है। गिरिडीह जिले के सदर अस्पताल में डायलिसिस सेंटर के कर्मियों ने मरीजों का डायलिसिस अचानक बंद कर दिया. पिछले कुछ माह से वेतन का भुगतान नहीं होने से कर्मियों ने विरोध करते हुए अचानक काम बंद कर दिया।
इसकी जानकारी जैसे ही मरीजों को मिली कि सदर अस्पताल में उनका डायलिसिस नहीं किया जाएगा तो सभी मरीज और उनके परिजन सदर अस्पताल के गेट के बाहर बैठ गए और हंगामा करने लगे. जिले के अलग अलग प्रखंडों से मरीज डायलिसिस कराने सदर अस्पताल पहुंचे हुए थे जिस कारण सदर अस्पताल में भारी हंगामा प्रारंभ हो गया।
सदर अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और संजीवनी डायलिसिस सेंटर के द्वारा मरीजों का निशुल्क डायलिसिस कराया जाता है. लेकिन पिछले कुछ माह से डायलिसिस सेंटर के कर्मियों को वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है.
इसी कारण जिले के डायलिसिस सेंटर में कार्यरत कर्मियों को मरीजों का डायलिसिस करने से मना कर दिया गया. इसी के बाद सभी मरीज और उनके परिजन सड़क पर बैठ गए. जिस कारण दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई और रोड जाम हो गया. इधर मामले की सूचना मिलने के बाद सदर एसडीएम विशालदीप खलखो मौके पर पहुंचे और सड़क पर बैठे सभी मरीजों को उठाकर डायलिसिस सेंटर तक पहुंचाया और मरीजों का डायलिसिस शुरु करवाया.
सदर एसडीएम विशालदीप खलखो ने बताया कि जैसे ही उन्हें इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर सभी मरीजों का इलाज शुरु करवाया. वही इस मामले में सिविल सर्जन से बात कर दोषी कर्मियों और डायलिसिस सेंटर चलाने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि मरीजों के जान के साथ सौदा करना किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इधर सिविल सर्जन डॉ एसपी मिश्रा ने कहा कि रांची की संजीवनी कंपनी के द्वारा सदर अस्पताल में डायलिसिस सेंटर का संचालन किया जा रहा है.
लेकिन इस कंपनी के द्वारा मनमानी की जा रही है. पहले तो कई माह तक बिल के लिए लटकाया जाता है और फिर ब्लैकमेल कर जबरन बिल पास करने का दबाव डाला जाता है.
सिविल सर्जन ने कहा कि आज जिस प्रकार से कर्मियों ने मरीजों के जान के साथ खिलवाड किया है. यह किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि वह आज ही इस मामले को लेकर सरकार से कंपनी के खिलाफ कार्यवाई करने की लिखित शिकायत करेंगे.







