Jharkhand: नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने राज्यपाल से मिलकर रांची वन मंडल के तत्कालीन डीएफओ राजीव लोचन बख्शी (IFS) के कार्यकाल में हुए गंभीर वित्तीय घोटाले, प्रशासनिक कदाचार एवं राजकोष की सुनियोजित लूट की उच्चस्तरीय जाँच एवं फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। मुलाकात के दौरान बाबूलाल मरांडी द्वारा ज्ञापन सौंपकर उनके तमाम काले कारनामों से राज्यपाल को अवगत कराया गया है।
Babulal Marandi ने ज्ञापन में क्या लिखा
महाशय मैं, आपका ध्यान झारखंड कैडर के एक अत्यंत चर्चित भारतीय वन सेवा अधिकारी, राजीव लोचन बख्शी के रांची वन प्रमंडल में डी.एफ.ओ. के रूप में बिताए गए कार्यकाल की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। राज्य के जागरूक नागरिक होने के नाते यह सूचित करना मेरा कर्तव्य है कि श्री बख्शी की कार्यशैली सदैव नियमों के संरक्षण के बजाय सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर उच्च स्तर पर ‘विशिष्ट सेवा-प्रदाता’ की रही है। अपनी इसी विशेषता के कारण वे वर्तमान मुख्यमंत्री के अत्यंत निकट बने हुए हैं और इसी राजनीतिक संरक्षण का लाभ उठाकर अपने कार्यकाल के काले कारनामों को दबाए रखने में सफल रहे हैं। यदि निष्पक्ष जाँच समय पर हुई होती, तो मात्र रांची वन प्रमंडल में उनके कार्यकाल में किए गए घोर भ्रष्टाचार के कारण वे आज जेल की सलाखों के पीछे होते। विडंबना यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद वे वर्तमान में सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के सर्वेसर्वा बने हुए हैं, जहाँ वे अपनी भ्रष्ट कार्यप्रणाली को निर्बाध रूप से जारी रखे हुए हैं।
करोड़ों रुपये की लूट की प्रबल आशंका, फॉरेंसिक जाँच की मांग
झारखंड महालेखाकार ने रांची वन प्रमंडल के उनके कार्यकाल की ऑडिट रिपोर्ट में अनेक ऐसी गंभीर अनियमितताओं को अंकित किया है, जो राजकोष की सुनियोजित लूट का प्रमाण देती हैं। महालेखाकार द्वारा 95 मस्टर रोल्स की प्रारंभिक जाँच (Test Check) में पाया गया कि झारखंड कोषागार संहिता के नियम 242-243 का घोर उल्लंघन कर ₹ 1.0383 करोड़ का संदिग्ध भुगतान किया गया है। इन मस्टर रोल्स पर न तो मजदूरों के हस्ताक्षर हैं, न अंगूठे के निशान, बल्कि इनमें ‘व्हाइटनर’ और ‘इरेजर’ लगाकर रिकॉर्ड के साथ आपराधिक छेड़छाड़ की गई है। मजदूरों को भुगतान बैंक खातों के बजाय नकद दिखाया गया, जो कि सरकारी निर्देशों की सीधी अवहेलना है। यह तो मात्र 95 मास्टर रोल्स की बानगी है; श्री बख्शी के पूरे कार्यकाल में हजारों ऐसे मस्टर रोल्स के माध्यम से करोड़ों रुपये की लूट की प्रबल आशंका है, जिसकी सघन फॉरेंसिक जाँच अत्यंत आवश्यक है।
प्रशासनिक कदाचार का एक और ज्वलंत उदाहरण देखने को मिलता है, जब श्री बख्शी ने अपने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग करते हुए ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रस्तावों को नियम विरुद्ध आठ खंडों में विभाजित कर दिया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि 7.35 हेक्टेयर वन भूमि के अपयोजन का आदेश वे स्वयं डी.एफ.ओ. स्तर पर दे सकें और इसे राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकार के पास न भेजना पड़े। इस कृत्य के माध्यम से उन्होंने यूजर एजेंसी को अनुचित लाभ पहुँचाया और सरकार को न्यूनतम ₹46.01 लाख की NPV राशि के राजस्व की सीधी क्षति पहुँचाई। ऑडिट टीम द्वारा पूछताछ किए जाने पर उन्होंने सदैव की तरह केवल टालमटोल भरा रवैया अपनाया।
महामहिम, भ्रष्टाचार की यह श्रृंखला यहीं समाप्त नहीं होती। CAMPA मद के अंतर्गत रेंजर्स को दिए गए ₹8,53,40,488 के अग्रिम का लेखा-जोखा जानबूझकर ऑडिट टीम से छिपाया गया, ताकि इस भारी राशि के व्यय की जाँच न हो सके। इस राशि का कहाँ और कैसे उपयोग हुआ, इसका कभी भौतिक सत्यापन नहीं हो सका। इसके अतिरिक्त, ₹1.80 करोड़ की सामग्री खरीद के मूल वाउचर ऑडिट में उपलब्ध ही नहीं कराए गए और यह भ्रामक तर्क दिया गया कि वे महालेखाकार को भेज दिए गए हैं। चूँकि सामग्री की वास्तविक खरीद का कोई प्रमाण (द्वितीय प्रति) कार्यालय में मौजूद नहीं है, इसलिए उससे संबंधित दिखाई गई लगभग ₹5.455 करोड़ की मजदूरी भी पूर्णतः बोगस और फर्जी प्रतीत होती है।
अतः महामहिम से विनम्र प्रार्थना है कि राज्य की प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने और सार्वजनिक धन की इस अकूत लूट को उजागर करने हेतु राजीव लोचन बख्शी के रांची वन प्रमंडल के पूरे कार्यकाल की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जाँच एवं फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश देने की कृपा करें।
Highlights







