डिजीटल डेस्क : जेल जाने से पहले बंदी वाहन से हुआ चिन्मय दास का संबोधन, बोले – युक्तिपूर्ण हैं हमारी मांगें। बांग्लादेश में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी के बाद चटगांव के छठें मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत के निर्देश पर जेल भेजे जाने से पहले इस्कॉन संत चिन्मय दास की एक झलक पाने को उमड़ी भीड़ बेकाबू होने लगी।
पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज से बेपरवाह महिलाएं, युवा और श्रद्धालु कोर्ट परिसर के बाहर सुनवाई शुरू होने से लेकर संत चिन्मय दास को जे ले जाए जाने तक डटे रहे।
लोग उस पुलिस काफिले के सामने जमीन पर लेट गए जिसमें संत चिन्मय दास को जेल ले जाना बंदी वाहन शामिल था। हालात अनियंत्रित होता देख बांग्लादेशी अधिकारियों ने बंदी वाहन के भीतर से चिन्मय कृष्ण दास संबोधन कराया।
39 सेकेंड का रहा चिन्मय कृष्ण दास प्रभु का संबोधन…
बंदी वाहन में चढ़ाए जाने के दौरान संत चिन्मय दास की एक झलक पाने को उनके समर्थक और अल्पसंख्यक हिंदुओं की भीड़ आतुर दिखी। जयश्रीम राम के उद्घोष से चटगांव के छठें मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत का परिसर गुंजायमान होने लगा। लोग सीताराम और जयश्रीराम के कीर्तन करने लगे।
कुछ देर पहले तक बर्बरतापूर्ण तरीके से घेराबंदी कर जिस भीड़ पर बांग्लादेशी पुलिस लाठीचार्ज करती दिखी थी, वही बाद में भीड़ को शांत कराने के लिए उनसे अनुनय-विनय की मुद्रा में हंसते हुए बंदी वाहन के लिए रास्ता देने को कहा।
लोग नहीं माने तो बंदी वाहन के बार से एक माइक मुहैया कराई गई और उसी से बंदी वाहन से संत चिन्मय दास ने करीब 39 सेकेंड का संक्षिप्त संबोधन दिया।
संत चिन्मय दास ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि –‘ …आवेग को संयत और संचित करके उसे शक्ति में बदलें। ….आप सभी शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करें। ….शांति-व्यवस्था बनाए रखें।
…हमारी मांगे युक्तिपूर्ण हैं और बेमानी नहीं हैं। मांगें पूरी न होने तक आप सभी आंदोलन चलाएंगे। आप सभी से अनुरोध है और प्रार्थना है कि देश की कानून व्यवस्था बनाए रखेंगे जो कि काफी अहम है’।
इसके बाद वी का निशान बनाकर बंदी वाहन से चिन्मय प्रभु ने अनुयायियों को दिखाया और मुट्ठी बांध कर एक रहने का संकेत दिया।

चटगांव कोर्ट परिसर में खूब गूंजा जयश्रीराम, चिन्मय प्रभु के दर्शन को उमड़े लोग
चटगांव में बीते सोमवार संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी की जानकारी की सूचना मिलते ही लोग सड़कों पर उतर गए। गिरफ्तार संत की रिहाई की मांग कर रहे सनातनी बैनर वाले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोगों पर हिंसक हमले भी हुए। लेकिन प्रदर्शनकारी अल्पसंख्यकों का विक्षोभ प्रदर्शन जारी है।
इस बीच कड़ी सुरक्षा के बीच संत चिन्मय दास को चटगांव के छठें मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट काजी शरीफुल इस्लाम की अदालत में मंगलवार को पेश किया गया। कोर्ट के बाहर लोगों ने आरोप लगाया कि हिरासत में बांग्लादेशी पुलिस ने संत चिन्मय पर अपशब्दों की बौछार करते हुए दुर्व्यवहार किया है।
चटगांव के छठें मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट काजी शरीफुल इस्लाम की अदालत ने मंगलवार को पेश किए गए चिन्मय कृष्ण दास की जमानत अर्जी खारिज कर दी। उसके बाद संत चिन्मय दास को जेल भेजने का निर्देश दिया।
यह जानकारी मिलते ही जयश्रीराम का उद्घोष करते अल्पसंख्यक हिंदुओं और संत चिन्मय समर्थकों की भीड़ पूरे कोर्ट परिसर में पुलिस बल के घेरे को तोड़कर उस बंदी वाहन तक पहुंचने में जुटी, जिसमें भारी सुरक्षा घेरे के बीच संत चिन्मय दास को जेल ले जाने के लिए बैठाया गया था।

चिन्मय दास प्रकरण पर बांग्लादेश से भारत ने खुलकर जताई नाराजगी, विदेश मंत्रालय ने दिया बयान
इस्कॉन संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु के खिलाफ बांग्लादेश में राजद्रोह का केस दर्ज करने, फिर उनकी गिरफ्तारी किए जाने और अब उनकी जमानत अर्जी को खारिज किए जाने पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया की है। बांग्लादेश में इस पूरे प्रकरण पर भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
बांग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और उन्हें जमानत देने से इनकार करने को भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इसे अल्पसंख्यकों खास तौर पर हिंदुओं के खिलाफ हमला बताया है।
बांग्लादेश में संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी के बाद वहां विक्षोभ प्रदर्शन कर रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हिंसक हमले और दमनात्कम कार्रवाई पर भी भारत ने गंभीर आपत्ति जताई है। पूरे मामले पर चिंता जाहिर करते हुए भारत ने बांग्लादेश के अधिकारियों से अपने देश में हिंदुओं के अधिकारों को सुनिश्चित कराने को कहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि – ‘सम्मिलित सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और जमानत देने से इनकार करना बेहद चिंताजनक है। यह घटना बांग्लादेश में चरमपंथियों की ओर से हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हुए कई हमलों के बाद हुई है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ चोरी और तोड़फोड़ और देवताओं और मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले दर्ज हैं।
….यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन घटनाओं के अपराधी अभी भी छुपे हुए हैं, लेकिन शांतिपूर्ण सभाओं के जरिए जायज़ मांगें पेश करने वाले धार्मिक नेता के खिलाफ़ आरोप लगाए जा रहे हैं। …हम कृष्ण दास की गिरफ्तारी के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे अल्पसंख्यकों पर हमलों पर भी चिंता व्यक्त करते हैं’।
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