कैदियों को भा रही अंगुलिमाल डाकू की कथा और तथागत बुद्ध का उपदेश
Gaya–तथागत बुद्ध का उपदेश-गया का सेंट्रल जेल संभवत: देश का पहला जेल है,
जहां भगवान बुद्ध के उपदेशों को कुख्यात अपराधियों को सुनाया जा रहा है.
अहिंसा परमो धर्म की महत्ता की बतायी जा रही है.
अंगुलिमाल डाकू की कथा सुनाकर जीवन में बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है.
गया सेंट्रल जेल के अधीक्षक के निर्देश पर पूरे कारा परिसर को बुद्ध के उपदेशों से जुड़े वॉल पेंटिंग से भर दिया गया है.
पूरा कारा परिसर बुद्धमय दिखलाई पड़ रहा है.
अंगुलिमाल डाकू की कथा पर आधारित चित्र वृतांत

बड़ी बात यह है कि भगवान बुद्ध के साथ ही अंगुलिमाल डाकू के चित्र वृतांत भी बनाए जा रहे हैं.
कैदियों के बीच इस तरह की पेंटिंग आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है.
कैदी बुद्ध की वॉल पेंटिंग के पास बैठकर अपना समय बीता रहे हैं,
भगवान बुद्ध के उपदेशों को पूरी तन्मयता के महसूस करने की कोशिश कर रहे हैं. तथागत बुद्ध के जीवन के विभिन्न आयामों को समझने की कोशिश कर रहे हैं, अहिंसा परमो धर्म:! के मर्म को समझने की कोशिश कर रहे हैं. कैदियों में इस बात की भी चर्चा है कि काश उनके जीवन में बुद्ध का प्रवेश कुछ समय पहले होता, तब वह इस अपराध की दुनिया का हिस्सा नहीं बनते.
रिपोर्ट- राम मूर्ति पाठक
Highlights







