Bihar Green Cover, पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि राज्य में पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हुए विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिहार का हरित आवरण क्षेत्र 6 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है। वहीं, सिंचित भूमि का क्षेत्रफल पहले के 21 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हो गया है। मुख्यमंत्री ने यह बातें लोक सेवक आवास स्थित ‘नेक संवाद’ में नेपाल के जनकपुर धाम से उत्तराखंड के देहरादून तक साइकिल यात्रा करने वाले दल से मुलाकात के दौरान कहीं। ‘प्रकृति ही प्रभु है’ थीम पर आधारित इस यात्रा का उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन, नदियों के पुनर्जीवन और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है।
जनकपुर धाम से देहरादून तक साइकिल यात्रा करने वाले दल का स्वागत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पर्यावरणविद् पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, पंकज मालवीय और उनकी टीम का स्वागत किया तथा यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा यह प्रयास सराहनीय है। डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने बिहार में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यावरण के क्षेत्र में अनोखे ढंग से काम हो रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित होगा।

बिहार का हरित आवरण 6 से बढ़कर 15 प्रतिशत हुआ
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार-झारखंड विभाजन के बाद राज्य का हरित आवरण क्षेत्र 6 प्रतिशत रह गया था। उनके अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी के नेतृत्व में पिछले 20 वर्षों के दौरान जल संरक्षण और वृक्षारोपण के कार्यों को गति मिली। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य का हरित आवरण अब बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है। इसके साथ ही सिंचित भूमि का क्षेत्रफल भी 21 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हुआ है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

बाढ़ और जल प्रबंधन के लिए स्थायी योजनाओं पर काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष वर्षापात में 32 प्रतिशत की कमी के बावजूद नेपाल से आने वाले पानी के कारण बिहार में बाढ़ की स्थिति बनी। गंडक, कोसी और गंगा नदियों के पानी को व्यवस्थित करने के लिए स्थायी योजनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच सहमति बनी है। सरकार इंद्रपुरी बराज के निर्माण और सोन नदी के पानी को फल्गु नदी से जोड़ने की योजना पर भी काम करेगी। इसका उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और पानी का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना है।

ग्रीन एनर्जी और इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने और जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए भी योजनाएं तैयार की गई हैं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को पर्यावरण के साथ संतुलित रखते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीण विकास और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में 1 करोड़ 81 लाख महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हैं और 50 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की बात कही गई। इसके अलावा 60 लाख पशु सखी तैयार करने तथा वर्ष 2030 तक बिहार की सभी महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण, ग्रीन एनर्जी और जल प्रबंधन से जुड़े सुझावों का स्वागत करते हुए साइकिल यात्रा दल को शुभकामनाएं दीं।



















