पटना में 13 आकांक्षी जिलों के अधिकारियों के लिए लैंगिक समानता और बाल अधिकार पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। नई जिला कार्ययोजना पर जोर दिया गया।
Bihar News पटना: बिहार के 13 आकांक्षी जिलों में लैंगिक समानता, बाल अधिकार और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन को जिला विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने की पहल शुरू हुई है। योजना एवं विकास विभाग की ओर से यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सोमवार को पटना के होटल द पनाश में दो दिवसीय क्षमता-वर्धन कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यशाला का उद्देश्य उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जिलों में व्यावहारिक, समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करना है।
Bihar News: लैंगिक समानता के लिए पूरे सरकारी तंत्र को मिलकर करना होगा काम
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि देश की आधी आबादी महिलाओं की है। इसलिए लैंगिक समानता को किसी एक या कुछ विभागों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए पूरे सरकारी तंत्र को मिलकर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की समय-सीमा को देखते हुए अब जिला स्तर पर स्पष्ट प्राथमिकताओं और ठोस कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। स्थानीय स्तर की वास्तविक चुनौतियों की पहचान कर उनके अनुरूप योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने से उनका प्रभाव बढ़ाया जा सकता है।
डॉ. विजयलक्ष्मी ने विभिन्न विभागों की योजनाओं में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल करने और उसे मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण है। अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय, स्थानीय प्राथमिकताओं की पहचान और तैयार कार्ययोजना को धरातल पर लागू करने में जिला प्रशासन की अहम भूमिका होगी।
Key Highlights
- बिहार के 13 आकांक्षी जिलों के अधिकारियों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला शुरू।
- लैंगिक समानता को किसी एक विभाग तक सीमित नहीं रखने पर जोर।
- 2030 तक Sustainable Development Goals हासिल करने के लिए जिला स्तर पर ठोस कार्ययोजना की जरूरत।
- बाल अधिकार और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन को जिला विकास से जोड़ने की पहल।
- उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जिलों में नई कार्ययोजना तैयार करने का लक्ष्य।
Bihar News: सूचना और तकनीक बढ़ी, लेकिन सोच में बदलाव अभी भी चुनौती
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि आज का समय सूचना और तकनीक का है। सूचनाओं तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हुई है, लेकिन समाज की पुरानी सोच और मानसिकता में अपेक्षित बदलाव अब भी चुनौती बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता फैलाने से सामाजिक बदलाव संभव नहीं होगा। मानसिकता में परिवर्तन के लिए सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन पर भी काम करना जरूरी है। महिलाओं और किशोरियों से जुड़े मुद्दों को समझते हुए उनके पीछे मौजूद सामाजिक मान्यताओं, व्यवहार और संस्थागत कारणों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
डॉ. विजयलक्ष्मी ने प्रशासन से लैंगिक समानता से जुड़ी वास्तविक समस्याओं और परिस्थितियों पर संवेदनशीलता के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक आधी आबादी आगे नहीं बढ़ेगी, तब तक विकसित राष्ट्र की परिकल्पना को पूरी तरह साकार नहीं किया जा सकता।
Bihar News: आकांक्षी जिलों में तैयार होगी नई कार्ययोजना
दो दिवसीय क्षमता-वर्धन कार्यक्रम के दौरान भाग लेने वाले जिलों के अधिकारियों को अपने क्षेत्र में लैंगिक समानता से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं की पहचान करने का अभ्यास कराया जा रहा है। इसके साथ ही उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा और समस्याओं के मूल कारणों का विश्लेषण किया जा रहा है।
इन अभ्यासों के आधार पर प्रत्येक जिले के लिए कार्ययोजना तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यशाला में योजना एवं विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, समेकित बाल विकास सेवाएं, पंचायती राज, जीविका, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को एक मंच पर लाया गया है।
इसका उद्देश्य लैंगिक समानता, बाल अधिकार और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में विभाग के सचिव कंवल तनुज, अपर सचिव श्याम बिहारी मीणा, यूनिसेफ के अभय कुमार, अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की निदेशक डॉ. एन. एच. शिवानी, उप निदेशक शिप्रा समेत संबंधित विभागों और आकांक्षी जिलों से आए अधिकारी मौजूद रहे।


















