हजारीबाग. जमीन घोटाला मामले में आईएएस अफसर विनय चौबे को कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। साथ ही तत्कालीन खासमहल पदाधिकारी विनोद चंद्र झा की जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई है। वहीं इसी मामले में आरोपित बनाए गए विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह की अग्रिम जमानत याचिका भी कोर्ट ने रद्द कर दी।
ACB ने हजारीबाग के खासमहल की 2.75 एकड़ जमीन की अवैध खरीद-बिक्री मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे को भी आरोपित बनाया था। यह मामला वर्ष 2008 से 2010 के बीच का है, जब विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त (DC) थे।
यह सुनवाई आज जिला जज कोर्ट में हुई, जिसमें प्रकरण संख्या 9/25 के तहत मामले की विस्तृत सुनवाई की गई। बचाव पक्ष की ओर से कई दलीलें पेश की गईं। वकीलों ने दावा किया कि चौबे द्वारा कोई गलती नहीं की गई और उन्होंने सभी नियमों के अनुसार कार्रवाई की थी।
गौरतलब है कि विनय चौबे पहले से ही चर्चित शराब घोटाले में आरोपी हैं और फिलहाल रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में 20 मई 2025 से न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
क्या है हजारीबाग खासमहल जमीन घोटाला?
यह मामला खासमहल की 2.75 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसकी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 23 निजी व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री कर दी गई थी। ACB ने 2015 में प्रारंभिक जांच दर्ज की थी, जिसमें यह खुलासा हुआ कि यह जमीन वर्ष 1948 में सेवायत ट्रस्ट को 30 साल की लीज पर दी गई थी, लेकिन लीज 1978 में समाप्त हो गई थी।
इसके बावजूद 2008 से 2010 के बीच, इस जमीन की प्रकृति को फर्जी तरीके से बदला गया, और 23 लोगों के नाम निबंधन कर दिया गया। जांच में सामने आया है कि उस वक्त DC रहे विनय चौबे की भूमिका संदिग्ध रही और उन्होंने लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया से जानबूझकर सेवायत ट्रस्ट का नाम हटवा दिया।
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