सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 के बाद हजारों छात्र 75% क्राइटेरिया पूरा नहीं कर पाने से संकट में हैं। JEE Advanced से पहले री-इवैल्यूएशन और सुधार परीक्षा को लेकर चिंता बढ़ी।
CBSE Result Crisis नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी Central Board of Secondary Education के 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद हजारों छात्रों और अभिभावकों के बीच असमंजस और चिंता की स्थिति गहरा गई है। इस वर्ष पहली बार लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया के कारण पास प्रतिशत घटकर 85.20 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम माना जा रहा है।
इसी बीच 17 मई को होने वाली JEE Advanced 2026 परीक्षा को लेकर छात्रों की चिंता और बढ़ गई है। बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिन्होंने JEE Main 2026 में 90 से 99 पर्सेंटाइल तक अंक हासिल किए हैं और जेईई एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई भी किया है, लेकिन वे 12वीं बोर्ड में 75 प्रतिशत अंकों की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
CBSE Result Crisis:ऑन-स्क्रीन मार्किंग और नए नियम बने परेशानी की वजह
इस बार सीबीएसई ने मूल्यांकन प्रक्रिया में ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया है। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। 10वीं के छात्रों को जहां दो बोर्ड परीक्षा और तीन विषयों में सुधार परीक्षा का विकल्प दिया गया है, वहीं 12वीं के छात्रों को केवल एक विषय में सुधार परीक्षा देने की अनुमति है।
सबसे ज्यादा परेशानी विज्ञान वर्ग के छात्रों को हो रही है। जिन छात्रों के फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स यानी PCM के तीनों विषयों में अपेक्षा से कम अंक आए हैं, उनके लिए केवल एक विषय की सुधार परीक्षा देकर 5 से 10 प्रतिशत अंकों की कमी पूरी करना बेहद कठिन माना जा रहा है।
Key Highlights
सीबीएसई 12वीं का पास प्रतिशत घटकर 85.20% हुआ
75% क्राइटेरिया पूरा नहीं कर पाने से छात्र परेशान
JEE Advanced से पहले बढ़ी छात्रों की चिंता
15 जुलाई को होगी सप्लीमेंट्री परीक्षा
री-इवैल्यूएशन फीस को लेकर अभिभावकों ने उठाए सवाल
CBSE Result Crisis:15 जुलाई को होगी सप्लीमेंट्री परीक्षा
सीबीएसई ने जानकारी दी है कि सप्लीमेंट्री परीक्षाएं 15 जुलाई को आयोजित की जाएंगी। वहीं री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया 18 मई से शुरू होगी। यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी।
- मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए 500 रुपये प्रति विषय शुल्क
- स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए 700 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका
- री-इवैल्यूएशन के लिए 100 रुपये प्रति प्रश्न शुल्क निर्धारित
अभिभावकों का कहना है कि जब कॉपियों की जांच डिजिटल माध्यम से की गई है तो इतनी अधिक फीस लेना उचित नहीं है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कई विषयों में री-इवैल्यूएशन कराना आर्थिक रूप से कठिन साबित हो सकता है।
CBSE Result Crisis:छात्रों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के अलग-अलग मानदंड छात्रों के लिए मानसिक दबाव बढ़ा रहे हैं। कई मेधावी छात्र जेईई मेन में शानदार प्रदर्शन के बावजूद केवल 75 प्रतिशत बोर्ड क्राइटेरिया के कारण इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश से वंचित हो सकते हैं।
अब छात्रों और अभिभावकों की नजर सीबीएसई और उच्च शिक्षा संस्थानों की अगली घोषणाओं पर टिकी हुई है।
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