रांची: बालू घाटों के आवंटन की प्रक्रिया में जेएसएमडीसी पूरी तरह विफल है. एनजीटी की प्रभावी रोक हटने के बाद भी प्रदेश में बालू आपूर्ति की समस्या बनी हुई है, इस कारण रियल इस्टेट कारोबार के साथ ही इससे जुड़े व्यापार एवं श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हो रही है.
हाल यह है कि जेएसएमडीसी की उदासीन कार्यप्रणाली से 654 बालू घाटों में से केवल 22 घाटों की नीलामी हो सकी है. इस कारण विकास के कार्य बाधित हो रहे हैं. उक्त बातें झारखंड चेंबर की माईस एवं मिनरल उप समिति की चेंबर भवन में हुई बैठक में व्यापारियों ने कही. व्यापारियों ने इस मामले में झारखंड चैबर से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया. व्यापारियों ने खनन पट्टे से पांच किलोमीटर की दूरी के अंदर ही क्रशर का संचालन करने के झारखंड.
चेंबर ने कहा : जेएसएमडीसी विफल, सिर्फ 22 बालू घाटों की हो सकी नीलामी
पॉल्यूशन बोर्ड के निर्णय पर नाराजगा जतायी. इसे शिथिल करने की मांग की. यही नहीं, अन्य प्रदेशों की तुलना में झारखंड में लघु खनिज पर दोगुना रॉयल्टी खनन विभाग द्वारा ली जाती है, जो अनुचित है. मईस एंड मिनरल उप समिति के चेयरमैन नितेश शारदा ने कहा कि खनन विभाग का पत्थर ऑक्शन पूरी तरह विफल है.
पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर झारखंड में भी पुरानी पत्थर खदान के लीज को 30 वर्षों तक एक्सटेंशन दिया जाना चाहिए, मौके पर चेंबर उपाध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, परेश गट्टानी, राम बांगड़, दिलीप साहू मोइन अखतर, क्रशर व्यवसायी मुन्ना सिंह, डॉ नीरज सिंह, डॉ अनल सिन्हा, प्रदीप सेन, राजेश रंजन, विश्वजीत शाहदेव, विक्रम कुमार, शंभु मंडल सहित पाकुड़, लोहरदगा, गुमला, जमशेदपुर, बोकारो, पलामू, ओरमांझी, टाटीसिलवे, चाईबासा आदि के व्यापारी शामिल हुए.
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