Jharkhand: रांची से Delhi एक गंभीर रूप से झुलसे मरीज को बचाने के लिए उड़ान भरने वाली Air Ambulance सोमवार शाम चतरा के जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बेहतर इलाज की उम्मीद में परिवार ने करीब 8 लाख रु खर्च कर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी, लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही यह सफर त्रासदी में बदल गया। हादसे में मरीज समेत सभी सात लोगों की मौत हो गई।
यह विमान रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से शाम 7:11 बजे उड़ा था। उड़ान भरने के 23 मिनट बाद, 7:34 बजे एटीसी से उसका संपर्क टूट गया। कुछ देर बाद पता चला कि एयर एंबुलेंस चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के कर्मा टांड़ जंगल में क्रैश कर चुकी है।

जिंदगी बचाने की कोशिश, लेकिन बीच रास्ते टूटी उम्मीद
41 वर्षीय संजय कुमार, जो लातेहार जिले के चंदवा के रहने वाले थे, 16 फरवरी को बकोरिया स्थित अपने ढाबे में लगी भीषण आग में करीब 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। उनकी हालत नाजुक थी और डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर कर दिया था।
परिवार ने अपनी सामर्थ्य से कहीं अधिक खर्च कर एयर एंबुलेंस का इंतजाम किया। लगभग ₹8 लाख देकर प्राइवेट चार्टर विमान बुक कराया गया। उम्मीद थी कि दिल्ली पहुंचते ही उन्हें उन्नत इलाज मिल सकेगा। लेकिन टेक ऑफ के महज 23 मिनट बाद ही विमान हादसे का शिकार हो गया।
23 मिनट की उड़ान और फिर रडार से गायब
डीजीसीए के अनुसार विमान ने शाम 7:11 बजे रांची से उड़ान भरी थी। 7:34 बजे तक उसका कोलकाता एटीसी से संपर्क था। इसके बाद अचानक रडार से संपर्क टूट गया।
स्थानीय ग्रामीणों ने जंगल में जोरदार धमाके की आवाज सुनी और घटनास्थल की ओर दौड़े। करीब आधा किलोमीटर के दायरे में विमान के पंख, धड़ और अन्य हिस्से बिखरे मिले। ईंधन की गंध दूर तक महसूस की गई।
प्रशासन ने तुरंत इलाके को सील कर दिया। सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है ताकि सबूत सुरक्षित रहें और जांच प्रभावित न हो।
खराब मौसम या तकनीकी वजह
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रांची में सोमवार शाम मौसम खराब था और चेतावनी भी जारी थी। टेक ऑफ के समय मौसम की स्थिति सामान्य नहीं थी। ऐसे में खराब मौसम को संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि कुछ तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि विमान पुराना मॉडल था और तकनीकी खराबी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
रेड बर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड का यह बीचक्राफ्ट C90 एयरक्राफ्ट वीटी एजीवी रजिस्टर्ड एयर एंबुलेंस था। डीजीसीए ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फ्लाइट रिकॉर्डर यानी ब्लैक बॉक्स को बरामद करने की प्रक्रिया जारी है। अंतिम सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
एक परिवार ने अपने प्रियजन को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन नियति ने बीच रास्ते ही सब कुछ छीन लिया। अब पूरे राज्य की नजर जांच पर टिकी है कि आखिर 23 मिनट की इस उड़ान में ऐसा क्या हुआ जिसने सात जिंदगियां छीन लीं।
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