बाल विवाह बच्चों के लिए अभिशाप है इसके लिए हर इंसान को जागरूक होना होगा: पीयूष प्रभाकर, प्रधान न्यायाधीश, मुजफ्फरपुर
Muzaffarpur : समाज के आधे अंग को छांटकर आगे के विकास की कल्पना नहीं कर सकते हैं। बाल विवाह जैसा अभिशाप ग्रामीण स्तर पर बताने और जागरूक करते रहने के अलावे कोशिश करते रहने से दूर किया जा सकता है। यह बातें मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट,परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पीयूष प्रभाकर ने मुजफ्फरपुर के जिला विधिक सेवा प्राधिकार भवन में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में आशा और आंगनबाड़ी सेविका को संबोधित करने के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए कही।
परिवार की अर्थिक स्थिति में सुधार से ही बाल विवाह में कमी संभव
इस अवसर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद मुजफ्फरपुर जिला के मोतीपुर प्रखंड बरूराज की आंगनबाड़ी सेविका शिम्पी कुमारी का कहना है कि ग्रामीण इलाके के निचले स्तर पर जब तक परिवार का आर्थिक स्थिति सही नहीं होगा तब तक यह समस्या का पूरा समाधान मुश्किल है इसके लिए हम लोग लगातार उसे इलाके में जाकर जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में संयुक्त रूप से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को लेकर पोस्ट और स्टीकर भी जारी किया गया।
बाल विवाह मुक्त भारत की जागरुकता से से घटेंगे मामले
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश को बाल विवाह से मुक्त करना है। अभियान में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और अन्य हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार भी किया जा रहा है। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के अंत में बाल विवाह रोकथाम का संकल्प लिया। इस आयोजन से जिले में बाल विवाह के खिलाफ जमीनी स्तर पर मजबूत प्रयासों को बल मिलेगा।
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव जयश्री कुमारी, समग्र शिक्षण एवं विकास संस्था के जिला समन्वयक भगवान पाठक समेत सैकड़ो की संख्या में आशा और आंगनबाड़ी सेविकाओं ने भाग लिया।
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संतोष कुमार की रिपोर्ट
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