सम्राट को लेकर कांग्रेस ने किए कई खुलासे, डिग्री के साथ उम्र भी छिपाये…

पटना : कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे और मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने प्रेसवार्ता की। मीडिया से बातचीत के दौरान सुप्रिया श्रीनेत ने बिहार के डिप्टी सीएम व तारापुर से एनडीए के प्रत्याशी सम्राट चौधरी को लेकर कई खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि आज आपके सामने कुछ खुलासा करने आए हैं। खुलासा बीजेपी के पोस्टर बॉय सम्राट चौधरी उर्फ राकेश कुमार को लेकर है।

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मोदी-शाह के चहेते सम्राट जब मर्जी होती है अपनी उम्र बढ़ाते हैं, जब मर्जी होती है घटाते हैं – सुप्रिया श्रीनेत

राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि अभी तक तो उनकी डिग्री पर ही विवाद था पर अब तो उनका झूठ उनकी उम्र को लेकर भी है। अपने चुनावी हलफनामे पर झूठ बोलने के क्या परिणाम होते हैं, यह तो आप मुझसे बेहतर जानते हैं। संविधान के आर्टिकल 173 के अनुसार, अपना नॉमिनेशन भरते वक्त लोकसभा या विधानसभा का कोई भी उम्मीदवार कम से कम 25 वर्ष की आयु का होना चाहिए और अगर ऐसा नहीं है तो वह अयोग्य घोषित होगा।

लेकिन इसी कानून की धज्जियां उड़ाते हुए बिहार में तो जादू चल रहा है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के चहेते सम्राट चौधरी जब मर्जी होती है अपनी उम्र बढ़ाते हैं, जब मर्जी होती है घटाते हैं।

कांग्रेस ने कहा- चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपने आपको 56 वर्ष घोषित किया और अपनी जन्मतिथि 1968 बताई

कांग्रेस पार्टी ने कहा कि इस बार के अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपने आपको 56 वर्ष घोषित किया और अपनी जन्मतिथि 1968 बताई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर, 2003 को एक बेहद विस्तृत और निर्णायक फैसले में इन्हीं सम्राट चौधरी की जन्मतिथि 1981 मानते हुए, इनका परबत्ता असेंबली से साल 2000 का निर्वाचन रद्द किया था। चुनाव अवैध घोषित किया था और इनको मंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था।

उच्चतम न्यायालय ने बिहार सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड के सर्टिफिकेट के आधार पर यह फैसला सुनाया था। बोर्ड ने 1996 में सम्राट चौधरी उर्फ राकेश कुमार को कृतानंद विद्यालय से बतौर प्राइवेट कैंडिडेट रोल नंबर 19 कार्ड दिया था यह अलग बात है, वह इम्तिहान में फेल हो गए थे।

सम्राट का फर्जीवाड़ा पकड़ने का काम सर्वप्रथम दिवंगत सुशील मोदी ने किया था – सुप्रिया

गौरतलब तो यह है कि सम्राट चौधरी का फर्जीवाड़ा पकड़ने का काम सर्वप्रथम दिवंगत सुशील मोदी ने किया था। मतलब सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के मुताबिक, तो यह आज 44 साल के होने चाहिए, लेकिन यह तो जादू से 56 के हो गए। कमाल की बात तो ये है कि बिहार बीजेपी में इसी जादू से उम्र बढ़ जाती है जादू से घट जाती है।

लेकिन जो हो रहा है वो कानूनन अपराध है। यहां पर सबूतों के साथ आपके सामने इनके इलेक्शन एफिडेविट, सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर सब रखा है। अब इस मामले में चुनाव आयोग क्या करता है यह देखना रोचक होगा। यहां एक छोटी सी बात याद दिलाना जरूरी है कि 1995 के तारापुर हत्याकांड में बेल लेने के किए इन्हीं सम्राट उर्फ राकेश कुमार ने अपने आपको 15 साल का नाबालिग बता कर बेल ली थी। मतलब इन्होंने तब माना था कि यह 1981 में पैदा हुए थे, जिसको इन्होंने अब अपनी सहूलियत से 1968 कर दिया है।

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा- 15 साल में होनी तो 44 साल चाहिए थी लेकिन जादू से ही गई 56

इसी दौरान इन्होंने लिखित में यह भी बताया था कि उनके बड़े भाई रोहित कुमार जो बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पढ़ रहे थे। 1999 में उनकी उम्र 22 साल थी। सम्राट चौधरी उस समय 25 साल के कैसे हो सकते थे? इसी सबके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। इन्हीं सम्राट चौधरी ने अपने 2010 के हलफनामे में अपनी उम्र 28 साल बतायी थी।

जो 15 साल में होनी तो 44 साल चाहिए थी लेकिन जादू से ही गई 56। लेकिन यह सिर्फ सम्राट भर की बात नहीं है। यह सारा फर्जीवाड़ा, यही ठगी तो असल में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और उनकी ब्रांड ऑफ राजनीति को दर्शाता है। झूठ बोलना, धोखाधड़ी करना, फर्जीवाड़ा करना और डेटा के साथ खिलवाड़ करना, यही उनकी राजनीति रही है। यही उनके नीति निर्माण में भी झलकता है। तथाकथित डबल इंजन की ट्रबल सरकार बिहार में चल रही है।

ऐसे ही फर्जीवाड़े, झूठ और फरेब पर टिकी हुई है। बिहार अपने तप, तर्पण, तपस्या व अपने ज्ञान के लिए जाना जाता है। बिहार की दुनिया में साख अपनी इमानदारी, अपनी बुद्धिमत्ता, बिहार अपनी कर्मठता लिए है। उसको मिट्टी में मिलाने का काम बीजेपी, अमित शाह, नरेंद्र मोदी और उनके सिपहसालार यहां पर कर रहे हैं।

बिहार तो ज्ञान की भूमि है और उस ज्ञान की भूमि में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है – कांग्रेस पार्टी

उन्होंने कहा कि बिहार तो ज्ञान की भूमि है और उस ज्ञान की भूमि में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है। करने वाला मोदी शाह का इतना खैस आदमी जिसको इन्होंने अपना अध्यक्ष बनाया। उपमुख्यमंत्री बनाया। जो इनका सबसे बड़ा सिपहसालार बना हुआ है। यह सब देखने के बाद भी सारा झूठ जानने के बावजूद बीजेपी के नेता, खुद प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मुंह में दही जमाए, आंखों पर पट्टी बांधे, ध्यान लगाए बैठे हुए हैं।

अगर ऐसा फर्जीवाड़ा कोई आम आदमी करता या विपक्ष का कोई व्यक्ति करता तो प्रशासन क्या करता? सरकार क्या करती? क्या ऐसे व्यक्ति को नौकरी मिलती? या झूठे दस्तावेज देने के लिए उसको तत्काल बर्खास्त कर दिया जाता? लेकिन नहीं यहां तो फर्जीवाड़ा करने वाला उपमुख्यमंत्री है, उम्मीदवार बना बैठा है।

ऐसे व्यक्ति को तो बीजेपी को दरकिनार करना चाहिए और उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। बीजेपी से नैतिकता और मर्यादा की उम्मीद करना बेमानी है. लगातार बिहार को ठगने पर भी तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। पर अगर बीजेपी ऐसा नहीं करेगी तो कड़ा दंड देने का काम बिहार की देवतुल्य जनता करेगी।

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मोदी-शाह के उम्मीदवारों को हराकर जनता इस बेधड़क बेशर्म ठगी का हिसाब करेगी – राष्ट्रीय प्रवक्ता

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि मोदी-शाह के उम्मीदवारों को हराकर जनता इस बेधड़क बेशर्म ठगी का हिसाब करेगी। तब बीजेपी को सीख मिलेगी कि जनता को मूर्ख समझना, उनको बेवकूफ समझना, उनके साथ धोखाधड़ी करना, क़ानून की धज्जियां उड़ाना बंद करना होगा। इस मंच से चुनाव आयोग से अपील है कि आप इस पूरे मामले की जांच करें और हर बार की तरह मूकदर्शक बने रहने का काम ना करें।

संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रीय मीडिया को-ऑर्डिनेटर एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे , नेशनल मीडिया कॉर्डिनेटर संजीव सिंह, कोषाध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ और नदीम अख्तर अंसारी मौजूद रहे।

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स्नेहा राय की रिपोर्ट

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