DAV Kapildev Principal Case: सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज की, मनोज कुमार सिन्हा को 1 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश

डीएवी कपिलदेव के पूर्व प्राचार्य मनोज कुमार सिन्हा की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की। कोर्ट ने एक सप्ताह में सरेंडर करने और ट्रायल जल्द पूरा करने का आदेश दिया।


DAV Kapildev Principal Case : रांची से जुड़े बहुचर्चित नर्स छेड़छाड़ मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। डीएवी कपिलदेव स्कूल के पूर्व प्राचार्य मनोज कुमार सिन्हा की अपील याचिका सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दी। सर्वोच्च अदालत ने उन्हें एक सप्ताह के भीतर संबंधित प्राधिकरण के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है।सुनवाई के दौरान मनोज के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोप संदेह पर आधारित हैं और कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। उनका कहना था कि मामले का ट्रायल चल रहा है और कई गवाहियों की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। उन्होंने कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।


Key Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने मनोज कुमार सिन्हा की अपील याचिका खारिज की।

  • कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया।

  • राज्य सरकार ने रांची एसएसपी की रिपोर्ट के आधार पर आरोपों की पुष्टि बताई।

  • कोर्ट ने कहा कि जमानत का दुरुपयोग हुआ है, जांच जारी है।

  • ट्रायल को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए।

  • हाईकोर्ट ने 20 जून 2025 को उनकी जमानत निरस्त की थी।


DAV Kapildev Principal Case:

वहीं, राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि रांची एसएसपी की रिपोर्ट में प्रथमदृष्टया आरोपों की पुष्टि होती है। सरकार ने कहा कि आरोपी के खिलाफ जमानत का दुरुपयोग करने के संकेत मिले हैं और इस संबंध में जांच जारी है।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि जमानत के दुरुपयोग के साक्ष्य मिलने के कारण राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश ट्रायल की स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं करेगा।

DAV Kapildev Principal Case:

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उम्र को ध्यान में रखते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए।

गौरतलब है कि 21 नवंबर 2022 को मनोज कुमार सिन्हा को झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। लेकिन पीड़िता की शिकायत पर 20 जून 2025 को हाईकोर्ट ने उनकी जमानत निरस्त कर दी थी। इसी आदेश के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।

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