- केंद्र ने अनुराग गुप्ता को 30 अप्रैल के बाद डीजीपी बनाए रखने पर आपत्ति जताई
- मुख्यमंत्री बुधवार को लौटेंगे, उसी दिन अंतिम निर्णय की संभावना
- हाईकोर्ट में गुप्ता की पत्नी व अन्य के प्रमाणपत्रों पर भी चल रही है सुनवाई
- सरकार कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है, बुधवार निर्णायक दिन
रांची: डीजीपी अनुराग गुप्ता के पद पर बने रहने को लेकर स्थिति असमंजस में है। केंद्र सरकार के पत्र के बाद अब यह मामला और संवेदनशील हो गया है। केंद्र ने झारखंड सरकार से अनुराग गुप्ता को 30 अप्रैल के बाद डीजीपी पद पर बनाए रखने के निर्णय को गलत बताते हुए उन्हें रिटायर करने का निर्देश दिया है।
इधर, राज्य सरकार भी इस मामले को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार अनुराग गुप्ता को पद पर बनाए रखते हुए केंद्र से पुनर्विचार का आग्रह कर सकती है। वहीं, अगर इस पर सहमति नहीं बनती है, तो राज्य सरकार को नया डीजीपी चुनना पड़ सकता है और ऐसे में अनुराग गुप्ता को अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेनी होगी।
इस बीच, मंगलवार को गृह विभाग में पूरे दिन डीजीपी से संबंधित फाइलों को लेकर हलचल बनी रही। हालांकि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश दौरे से लौटने के बाद ही लिया जाएगा। मुख्यमंत्री और उनके अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार के बुधवार को रांची लौटने की संभावना है।
इसी मुद्दे से जुड़ा एक और मामला झारखंड हाईकोर्ट में लंबित है। डीजीपी अनुराग गुप्ता की पत्नी व आईपीएस अधिकारी प्रिया दुबे, और संतोष दुबे के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता अरुण कुमार ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों के पीजी स्तर के प्रमाणपत्र फर्जी हैं और सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग की है। अदालत ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रख लिया है। हालांकि सुनवाई के दौरान जनहित याचिका की प्रासंगिकता पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई।
राज्य सरकार, केंद्र के निर्देश के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है। अगर वह हाईकोर्ट का रुख करती है, तो उसे बुधवार तक ही यह कदम उठाना होगा, क्योंकि यह केंद्र के पत्र की समय-सीमा का अंतिम दिन है।
इस बीच राज्य सरकार के कानूनी सलाहकारों द्वारा सभी पुराने नोटिफिकेशनों और प्रावधानों का अध्ययन किया जा रहा है ताकि उचित कदम उठाया जा सके।







