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बिहार के 38 जिलों में हरा चारा मानचित्रण अध्ययन की शुरुआत

पटना : राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (COMFED) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISPC) के सहयोग से बिहार के सभी 38 जिलों में हरा चारा मानचित्रण अध्ययन आरंभ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में आज पटना में रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस आधारित हरा चारा मानचित्रण अध्ययन पर कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने किया

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन को सुदृढ़ बनाने के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपायों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक समीर सौरभ (IAS) ने अपने संबोधन में कहा कि हरा चारा मानचित्रण से पशुपालकों को बेहतर योजना निर्माण में सहायता मिलेगी व दुग्ध उत्पादन की लागत को नियंत्रित किया जा सकेगा। कार्यक्रम को एनडीडीबी, कोलकाता के क्षेत्रीय प्रमुख डॉ. सब्यसाची रॉय ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

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इस कार्यक्रम में पटना के अलावा जिले के अधिकारी रहे मौजूद

इस कार्यशाला में वीपीएमयू (पटना), तिमूल (मुजफ्फरपुर), डीआरएमयू (बरौनी), एसएमयू (आरा) सहित विभिन्न दुग्ध संघों के प्रबंध निदेशक, बिहारशरीफ डेयरी परियोजना (नालंदा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, संबंधित इकाइयों के नोडल पदाधिकारी एवं गणनाकर्ता उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस तकनीक के उपयोग से हरा चारा मानचित्रण की प्रक्रिया, डेटा संग्रहण एवं विश्लेषण की विधियों की विस्तृत जानकारी दी गई।

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हरा चारा मानचित्रण अध्ययन का मुख्य उद्देश्य राज्य में चारा फसलों के क्षेत्रफल एवं विभिन्न किस्मों का सटीक आकलन करना है

हरा चारा मानचित्रण अध्ययन का मुख्य उद्देश्य राज्य में चारा फसलों के क्षेत्रफल एवं विभिन्न किस्मों का सटीक आकलन करना है। दुग्ध उत्पादन की कुल लागत में चारा एवं पशु आहार का लगभग 70 प्रतिशत योगदान होता है। ऐसे में हरे चारे की उपलब्धता, गुणवत्ता एवं सतत आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्ययन चारे की फसल के क्षेत्र, गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता और सिंचाई सुविधाओं के आधार पर समग्र स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रदान करेगा।

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इस पहल के माध्यम से राज्य में डेटा आधारित नीति निर्माण एवं रणनीति तैयार करने में सहायता मिलेगी

इस पहल के माध्यम से राज्य में डेटा आधारित नीति निर्माण एवं रणनीति तैयार करने में सहायता मिलेगी, जिससे दुग्ध उत्पादन को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाया जा सकेगा। बिहार सरकार, एनडीडीबी एवं कॉम्फेड के संयुक्त प्रयास से यह पहल राज्य के पशुपालकों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी और दुग्ध क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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