रहस्यमयी आग से दहशत में घर वाले, सड़क पर रात काटने को मजबूर, रोटी नहीं मिलने पर बुजुर्ग ने दिया श्राप
गयाजी : जिले के शेरघाटी प्रखंड के कचौड़ी पंचायत अंतर्गत कुशा गांव में बीते एक सप्ताह से हो रही रहस्यमयी आगलगी की घटनाओं ने एक परिवार को दहशत में डाल दिया है। गांव निवासी लखन मिस्त्री के घर में रखे कंबल, बिछावन, कपड़े, खटिया और अनाज में अचानक आग लग जा रही है। हैरानी की बात यह है कि आग उन स्थानों पर भी लग रही है, जहां न तो बिजली का कनेक्शन है और न ही कोई ज्वलनशील पदार्थ।
कड़ाके की ठंढ़ में परिवार सड़क पर रात बिताने को मजबूर
लगातार हो रही घटनाओं से भयभीत होकर लखन मिस्त्री का पूरा परिवार घर में रहना छोड़ चुका है। घर के 12 सदस्य—जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे शामिल हैं—कड़ाके की ठंड के बावजूद सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। एहतियातन परिवार ने घर का सारा सामान बाहर निकाल कर सड़क किनारे रख दिया है।
बुजुर्ग ने रोटी नही मिलने पर घर में आग लगने की कही थी बात
पीड़ित परिवार के अनुसार 28 दिसंबर 2025 को एक भूखा-प्यासा बुजुर्ग उनके घर भोजन मांगने पहुंचा था। घर की मंझली बहु सुलेखा देवी ने उसे पका हुआ चावल और पानी दिया, लेकिन बुजुर्ग ने रोटी की मांग की। घर में रोटी नहीं होने पर वह नाराज हो गया और जाते-जाते घर में आग लगने की धमकी देकर चला गया।
गांव में भय और कौतूहल का माहौल
परिवार का दावा है कि इसी घटना के कुछ दिनों बाद से घर में रहस्यमयी ढंग से आग लगने की घटनाएं होने लगीं। घटना को लेकर गांव में भय और कौतूहल का माहौल है। ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे तंत्र-मंत्र या ओझा-गुनी से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे किसी साजिश की आशंका भी जता रहे हैं। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
पूर्व मुखिया ने प्रशासन से की मदद की मांंग
घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व कचौड़ी पंचायत मुखिया संतोष कुमार गुप्ता पीड़ित परिवार से मिले और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल भोजन, पेयजल और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता जताई है।
फिलहाल पीड़ित परिवार सड़क किनारे ठंड में रातें काटने को विवश है। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि रहस्यमयी आगलगी के कारणों का पता कब चलता है और पीड़ित परिवार को कब राहत मिलती है।
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