पटनाः- देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान और राजनीतिक बिरादरी में मौसम विज्ञानी का तमगा हासिल करने वाले रामविलास पासवान की मौत के बाद लोजपा का बंगला अब संकट में है. कुनबा बिखरता नजर आ रहा है. चाचा पारसनाथ और बेटे चिराग पासवान के बीच जारी खींचतान में पार्टी के पहचान पर ही संकट खड़ा हो गया है.
बता दें कि रामविलास पासवान की मौत के बाद चाचा भतीजा के बीच विरासत को लेकर संघर्ष जारी है. लोक जनशक्ति के पांच सांसदों ने पाला बदल कर चाचा पारसनाथ का दामन थाम लिया है. चाचा पारसनाथ बिहार सरकार में एनडीए का हिस्सा और केन्द्र सरकार में मंत्री बन सत्ता सुख का आनन्द ले रहे हैं, जबकि कभी अपने आप को मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग पासवान बिहार की गलियों में दर-दर की ठोकरें खा पिता रामविलास पासवान के विरासत पर अपने दावे को ढोंक रहे है.
दर-दर भटक रहा मोदी का हनुमान
इस बीच चुनाव आयोग ने लोक जनशक्ति पार्टी का चुनाव चिन्ह को जब्त करने की घोषणा कर दी है, अब इस लोक जनशक्ति पार्टी के दोनों ही खेमे चुनाव चिन्ह बंगले को इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे.
दरअसल चुनाव आयोग की ओर से बंगले जब्त करने की कार्रवाई बिहार विधान सभा की दो खाली सीटों कुशेश्वरस्थान और तारापुर पर किये जा रहे उप चुनाव को देखते हुए किया गया है. चिराग पासवान ने 30 अक्टूबर को होने वाले इस उप चुनाव में पार्टी का चुनाव चिन्ह बंगले पर कब्जे का दावा किया था.

यह चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश है, जब तक चुनाव आयोग अंतिम का फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी गुट को इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी.
हालांकि, लोकसभा में पारसनाथ गुट को लोक जनशक्ति को तौर पर मान्यता प्राप्त है और इस गुट का नेतृत्व रामविलास पासवान के छोटे भाई और चिराग के चाचा पारसनाथ कर रहे है.
देखना दिलचस्प होगा की आने वालों दिनों में यह बंगला किसका होता है और देश और बिहार की राजनीति में अपने सिक्का चलाने वाले रामविलास पासवान की विरासत किसके हिस्से हाथ आएगी. फिलवक्त तो मोदी के हनुमान बिहार की सड़कों का धूल फांक रहा है.
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