Electricity Bill :बिजली संशोधन विधेयक 2025 के तहत यदि मार्च तक टैरिफ तय नहीं हुआ तो अप्रैल से बिजली दरें स्वतः बढ़ेंगी। साझा नेटवर्क से कई कंपनियां बिजली देंगी।
Electricity Bill रांची: देश के बिजली क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार बिजली संशोधन विधेयक 2025 के जरिए पहली बार ऐसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिसमें एक ही वितरण नेटवर्क से कई कंपनियां बिजली आपूर्ति कर सकेंगी। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं, उद्योगों और राज्य बिजली वितरण कंपनियों पर पड़ेगा।
इस विधेयक का सबसे अहम प्रावधान यह है कि यदि राज्य बिजली नियामक आयोग मार्च महीने तक बिजली टैरिफ तय नहीं करते हैं, तो अप्रैल से बिजली दरें एक तय फॉर्मूले के आधार पर स्वतः लागू हो जाएंगी। अब तक कई राज्यों में राजनीतिक कारणों से वर्षों तक टैरिफ नहीं बढ़ाया जाता था, जिससे बिजली वितरण कंपनियां भारी घाटे में चली जाती थीं।
Electricity Bill : मार्च तक टैरिफ नहीं तय हुआ तो स्वतः लागू होंगी नई दरें
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नियामक आयोग अब स्वयं सुओ मोटो टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। हर साल समय पर टैरिफ ऑर्डर जारी करना अनिवार्य होगा। यदि किसी कारण से आयोग तय समय सीमा तक टैरिफ तय नहीं करता है, तो अप्रैल से नई दरें अपने आप प्रभावी हो जाएंगी। इससे वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
Key Highlights
मार्च तक टैरिफ तय नहीं हुआ तो अप्रैल से बिजली दरें स्वतः बढ़ेंगी
बिजली संशोधन विधेयक 2025 से साझा नेटवर्क व्यवस्था लागू होगी
एक ही नेटवर्क से कई कंपनियां बिजली आपूर्ति कर सकेंगी
उद्योग, रेलवे और मेट्रो को क्रॉस सब्सिडी से राहत का प्रस्ताव
पावर इंजीनियर संगठनों ने बिल का कड़ा विरोध किया
Electricity Bill : एक ही नेटवर्क से कई बिजली सप्लायर देने की तैयारी
बिजली संशोधन विधेयक 2025 में बिजली वितरण के क्षेत्र में साझा नेटवर्क की अवधारणा लाई जा रही है। अब किसी भी वितरण लाइसेंसधारी कंपनी के लिए अपना अलग नेटवर्क रखना जरूरी नहीं होगा। कंपनियां तय व्हीलिंग चार्ज देकर एक दूसरे के नेटवर्क का उपयोग कर सकेंगी। इससे महंगे और दोहरे नेटवर्क की जरूरत खत्म होगी और वितरण में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
Electricity Bill : उद्योग और रेलवे को क्रॉस सब्सिडी से मिलेगी राहत
केंद्र सरकार का लक्ष्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। इसी के तहत मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो को बड़ी राहत देने का प्रस्ताव है। अगले पांच वर्षों में इन क्षेत्रों को ऊंची बिजली दरों के रूप में दी जा रही क्रॉस सब्सिडी से मुक्त किया जाएगा। इससे औद्योगिक उत्पादन लागत घटने और निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
Electricity Bill : बैकडोर प्राइवेटाइजेशन का आरोप, विरोध भी तेज
प्रस्तावित विधेयक का ऑल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन ने कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि इससे निजी कंपनियों को बिना निवेश के सार्वजनिक नेटवर्क का लाभ मिलेगा और सरकारी वितरण कंपनियां कमजोर होंगी। फेडरेशन ने इसे सार्वजनिक बिजली तंत्र के लिए खतरा बताते हुए बैकडोर प्राइवेटाइजेशन करार दिया है।
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