रांची : देश में कोयले की कमी से विद्युत उत्पादन में आई कमी के कारण झारखंड में भी बिजली संकट देखने को मिल रहा है. झारखंड में गांव से लेकर शहर तक बिजली की कमी से लोग परेशान हैं. राज्य के शहरी क्षेत्रों में 17 से 18 घंटे तक ही बिजली मिल रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में औसतन 14 से 15 घंटे की आपूर्ति ही हो पा रही है. त्योहारी सीजन में बिजली संकट से लोगों की परेशानी बढ़ गई है.
झारखंड में जारी बिजली संकट पर ऊर्जा सचिव अविनाश कुमार ने 22 Scope से बातचीत करते हुए कहा कि कोयला उत्पादन में कमी का असर बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है. तेनुघाट परियोजना को भी पर्याप्त मात्रा में कोयला नहीं मिल रहा है. जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है.
त्योहारी सीजन में बिजली संकट को लेकर सचिव अविनाश कुमार ने कहा कि, राज्य सरकार केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और कोल मंत्रालय के साथ मिलकर कर काम कर रही है. त्योहार में स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा.
झारखंड बिजली वितरण निगम 400-450 मेगावाट तक की कमी को दूर करने के लिए इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से 20 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने का प्रयास कर रहा है, लेकिन हर राज्य से मांग के कारण झारखंड को कम बिजली मिल रही है.
रांची में 50-60 मेगावाट की कमी
बिजली संकट का असर रांची में भी देखने को मिल रहा है. रांची के कुल 250 मेगावाट की खपत है. मगर पीक ऑवर सुबह 6 बजे से 10 बजे तक तथा शाम को 7 बजे से 11 बजे तक कुल 50-60 मेगावाट की कमी चल रही है. इसके कारण रांची में लोड शेडिंग चल रही है.
सेंट्रल पावर एक्सचेंज से बिजली लेने को बाध्य
झारखंड में कुल बिजली की खपत डीवीसी कमांड सहित 2200 मेगावाट की है. जिसमें झारखंड की अपनी बिजली केवल 450 से 500 मेगावाट तक ही है. जिसमें टीवीएनएल-150 मेगावाट, आधुनिक पावर-180 मेगावाट, सिकिदरी हाईडल पावर-105 मेगावाट तथा इनलैंड पावर-55 मेगवाट. बाकी बिजली नेशनल पावर एक्सचेंज से ही लेना मजबूरी है.
रिपोर्ट : शाहनवाज़
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