डिजीटल डेस्क : Farmer Agitation 3 – फिर सुर्खियों में किसानों का दिल्ली कूच, नोएडा के महामाया फ्लाईओवर पर गहमागहमी। काफी दिनों बाद सोमवार को एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए किसानों का कूच सुर्खियों में छाया हुआ है।
इस बार भी मुख्यतः पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान दिल्ली कूच के लिए बार्डर पर 40 से 45 हजार की संख्या में संसद का घेराव करने का संकल्प लेकर अड़ गए हैं। नोएडा के महामाया फ्लाईओवर पर हंगामे का नजारा बना हुआ है।
प्रदर्शनकारी किसान कहीं कंटेनर पर चढ़ गए तो कहीं बैरिकेडिंग तोड़ी और दिल्ली की ओर बढ़ चले। उन्हें रोकने को तैनात फोर्स को पसीने बहाने पड़ रहे हैं। शासन-प्रशासन की ओर से सभी अहम बॉर्डर की बाड़ेबंदी की जा रही है लेकिन किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं ट्रैफिक जाम से हाहाकार मचा हुआ है।
Farmer Agitation 3- नोएडा बॉर्डर पर भयंक ट्रैफिक जाम, जनजीवन प्रभावित
किसान संगठनों ने एकजुट होकर दिल्ली कूच कर दी है। रस्सी से भीड़ को रोकने का पुलिस ने प्रयास किया था, लेकिन किसान रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। बॉर्डर पर आरएएफ की टीम मौजूद है। किसानों को दिल्ली की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के आलाधिकारी बॉर्डर में मौजूद हैं। किसानों को अभी महामाया फ्लाईओवर के पास रोका गया है।
किसान प्रदर्शन के चलते दिल्ली- नोएडा बॉर्डर पर यातायात प्रभावित है। दिल्ली जाने वाले लोग वाहनों में जहां-तहां फंसे हुए हैं। चहुंओर हाहाकार की स्थिति बनी हुई है। लोगों को नहीं सूझ रहा कि वे अपने गंतव्य तक कब और कैसे पहुंचेंगे। किसानों ने एक बार फिर दिल्ली कूच शुरू किया है। अब पुलिस ने दो बैरिकेडिंग के साथ दो क्रेन, एक ट्रक को बीच हाइवे पर खड़ा कर दिया है।
इसी तरह किसानों के दिल्ली कूच के एलान के साथ ही बॉर्डरों पर भारी संख्या में पुलिस बल और आरएएफ टीम को तैनात किया गया है। सभी किसान महामाया फ्लाइओवर के एकजुट हो गए हैं। जगह जगह बैरिकेडिंग की गई है। वहीं गाजियाबाद के यूपी गेट पर भी पुलिस तैनात है।

हाईवे पर बैठे किसान, जाम में फंसी एंबुलेंस, ताजा किसान आंदोलन में गोरखपुर की है चर्चा…
दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसानों को आखिरकार थोड़ी दूर चलने के बाद पुलिस ने रोक दिया है। इस पर किसान हाइवे पर ही बैठ गए हैं। लेकिन लगातार नारेबाजी जारी है। साथ ही भारी पुलिस बल भी तैनात है ताकि किसानों को दिल्ली जाने से रोका जाए। किसानों के हाईवे पर बैठने से भयंकर ट्रैफिक जाम की स्थिति से लोग परेशान हैं।
दिल्ली कूच के चलते दिल्ली-नोएडा रोड पर भारी जाम लग गया है। जाम में एंबुलेंस तक फंस गई है। कई वाहन घंटों से जाम में फंसे हुए हैं। फिलहाल, पुलिस ने किसानों को नोएडा में ही दलित प्रेरणा स्थल पर रोक दिया है। महामाया फ्लाइओवर से किसानों ने दिल्ली की ओर कूच किया था। किसानों के आंदोलन ने में इस बार गोरखपुर की बड़ी चर्चा है।
किसानों का आरोप है कि गौतमबुद्ध नगर के किसानों को गोरखपुर हाईवे परियोजना की तरह 4 गुना मुआवजा नहीं दिया गया। साथ ही, 2014 के बाद से अब तक सर्किल रेट में भी कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। साथ ही, लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय और 2020-21 के आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा मिले, इस सवाल पर भी वे इकठ्ठे हैं।

Farmer Agitation 3 : किसानों का सरकार को अल्टीमेटम –सरकार से मांगे पूरी न होने तक घरों को नहीं लौटेंगे
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान दिल्ली कूच करने के लिए नोएडा के महामाया फ्लाईओवर पर एकत्र हुए। एक किसान नेता ने कहा कि सरकार और अधिकारियों के पास हमारी मांगें पूरी करने का समय है। इसके बिना हम अपने घर नहीं लौटेंगे। हमने उन्हें पहले ही अपने कार्यक्रम बता दिए हैं।
अगर वे शाम तक कुछ घोषणा नहीं करेंगे, तो हम आगे अपने कार्यक्रम घोषित करेंगे। अधिकतर किसान संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले एकजुट हुए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें 10 अलग-अलग किसानों का संगठन है।
इनमें भारतीय किसान यूनियन टिकैत, भारतीय किसान यूनियन महात्मा टिकैत, भारतीय किसान यूनियन अजगर, भारतीय किसान यूनियन कृषक शक्ति, भारतीय किसान परिषद, अखिल भारतीय किसान सभा, किसान एकता परिषद, किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा, जय जवान-जय किसान मोर्चा और सिस्टम सुधार संगठन आगरा जैसे बड़े और अहम संगठन शामिल हैं।

Farmer Agitation 3 : दिल्ली कूच पर अड़े प्रदर्शनकारी किसानों की सरकार से की जा रही मांगों एकनजर में
दिल्ली कूच पर अड़े प्रदर्शनकारी किसानों की मांगे फिलहाल काफी बिखरी हुई नजर आ रही हैं। फिर भी मोटे तौर पर कहा जाए तो वे भूमि अधिग्रहण के सवाल पर उचित मुआवजा, फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी और किसानों के बकाया समस्याओं का समाधान करने को लेकर मुखर हैं।
किसान नए भूमि अधिग्रहण कानून के लाभ और हाई पावर कमेटी की सिफारिश लागू करने को लेकर भी आमादा हैं। इसमें आबादी क्षेत्र में 10 फीसदी प्लॉट, बाजार दर का 4 गुना मुआवजा, भूमिहीन किसानों के बच्चों को रोजगार और पुनर्वास की मांग अहम हैं।
इसके अलावा वे पुरानी मगर बड़ी मांगों में से एक झ्र कर्ज माफी, पेंशन, बिजली दरों में बढ़ोतरी न करने और पिछले प्रदर्शनों में दर्ज हुए पुलिस मामलों की वापसी को लेकर लामबंद हैं। संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस विज्ञप्ति पर अगर गौर करें तो पाते हैं कि वे इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
उनकी शिकायत है कि उनकी मांगों को लेकर सरकार ने 18 फरवरी के बाद ही से कोई बातचीत नहीं की है जबकि पहले ये कहा गया था कि सरकार किसानों से व्यवस्थित बातचीत कर एक ठोस समाधान ढूंढेगी।
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