रांची: झारखंड में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया है। बुधवार रात से शुरू हुई रुक-रुक कर बारिश गुरुवार रात तक जारी रही। इस दौरान अलग-अलग जिलों में ठनका गिरने से तीन बच्चियों सहित चार लोगों की मौत हो गई। मौसम केंद्र ने शुक्रवार को रांची, खूंटी, पलामू, चतरा और लातेहार जिलों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
ठनका गिरने से चार की मौत
चान्हो में गुरुवार को तीन बच्चियां छुट्टी के बाद स्कूल से घर लौट रही थीं। इसी दौरान ठनका गिरा और वे इसकी चपेट में आ गईं। मृतकों की पहचान परी उरांव (5), अली (10) और अंजलिका कुजूर (7) के रूप में हुई है। वहीं गुमला जिले में भैंस चराने खेत गए उरांव (30) की भी ठनका गिरने से मौत हो गई।
बारिश का दौर जारी रहेगा
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार मानसून का टर्फ लाइन इस समय जैसलमेर, कोटा, सीधी, रांची, बांकुड़ा और दीघा से गुजर रहा है। साथ ही दक्षिण ओडिशा पर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर भी झारखंड पर दिख रहा है। इसके चलते राज्य में अगले पांच दिनों तक मानसून सक्रिय रहेगा। पिछले 24 घंटे में रांची में 12 मिमी, जमशेदपुर में 11 मिमी और सरायकेला में 67.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम अलर्ट
22 अगस्त: पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट। रांची, खूंटी, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और धनबाद में भी भारी बारिश की संभावना।
23 अगस्त: पलामू में ऑरेंज अलर्ट, रांची और आसपास के जिलों के लिए यलो अलर्ट। लगभग 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने और ठनका गिरने की संभावना।
24 अगस्त: पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और रांची में बारिश।
25 अगस्त: पश्चिमी और मध्य झारखंड में कहीं-कहीं भारी बारिश।
मानसून अब तक अपने दो-तिहाई सफर पर है। सामान्य तौर पर 82 दिनों में 627.4 मिमी बारिश होती है, जबकि इस बार अब तक 641.7 मिमी बारिश हो चुकी है यानी सामान्य से 2.3% ज्यादा। पूरे चार महीने के सीजन में औसतन 868 मिमी बारिश होती है। ऐसे में सितंबर खत्म होने से पहले ही सीजन का लक्ष्य पूरा होने के संकेत हैं।
हालांकि देश के 9% हिस्से में अब भी बारिश सामान्य से कम है और यहां 30% की कमी दर्ज की गई है।
मानसून पर असर डालने वाले कारक
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून तीन प्रमुख कारकों से प्रभावित होता है—एनसो (एलनीनो-ला नीना), आईओडी (इंडियन ओशन डायपोल) और एमजेओ (मैडेन जुलियन ऑसिलेशन)। वर्तमान में एनसो और आईओडी न्यूट्रल हैं, हालांकि आईओडी के नकारात्मक होने की संभावना है जो मानसून के लिए प्रतिकूल होगी। यदि सितंबर में एमजेओ सक्रिय नहीं होता तो आगे बारिश घट सकती है।