अंडे से लेकर दूध तक… बिहार कैसे बना देश का उभरता हुआ फूड हब?

पटना : बिहार ने पशुपालन क्षेत्र में एक बार फिर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। दूध, अंडा और मांस उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर में राज्य ने राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ दिया है। केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, बिहार में अंडा उत्पादन में 10 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। वहीं दूध उत्पादन में बिहार छठवें स्थान और मांस उत्पादन में 4.03 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयालक्ष्मी ने विकास भवन स्थित विभागीय कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में दी

इन आंकड़ों की जानकारी पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयालक्ष्मी ने बुधवार को विकास भवन स्थित विभागीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि अंडा उत्पादन की वृद्धि दर में बिहार को देश में पहला स्थान मिला है, जबकि दूध उत्पादन की वृद्धि दर में राज्य छठे और मांस उत्पादन में नौवें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय स्तर पर दूध की वृद्धि दर 3.58 फीसदी, अंडा में 4.44 फीसदी और मांस में 2.46 फीसदी रही, जबकि बिहार की वार्षिक उत्पादन वृद्धि दूध में 4.24 फीसदी, अंडा में 9.99 फीसदी और मांस में 4.03 फीसदी की वृद्धि हासिल की।

Department of Animal and Fisheries Resources 1 22Scope News

बिहार में दूध, अंडे और मांस की प्रति व्यक्ति उपलब्धता भी बढ़ी है – अपर मुख्य सचिव

उन्होंने कहा कि बिहार में दूध, अंडे और मांस की प्रति व्यक्ति उपलब्धता भी बढ़ी है। 2023-24 में दूध 277 ग्राम प्रतिदिन, अंडा 27 प्रति वर्ष और मांस 3.19 किलोग्राम प्रतिवर्ष उपलब्ध था। वहीं 2024-25 में यह बढ़कर दूध 285 ग्राम प्रतिदिन, अंडा 29 और मांस 3.27 किलोग्राम प्रतिवर्ष हो गया है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि विभागीय योजनाओं और किसानों की निरंतर भागीदारी की बदौलत यह वृद्धि संभव हुई है।

डॉ. विजयालक्ष्मी ने कहा- मछली उत्पादन में भी बड़ी छलांग

डॉ. विजयालक्ष्मी ने कहा कि मछली उत्पादन के क्षेत्र में भी बिहार तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2013-14 में राज्य की राष्ट्रीय रैंकिंग 9वें स्थान पर थी, जो बढ़कर 2023-24 में चौथे स्थान पर पहुंच गई। योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के कारण राज्य अब मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो चुका है।

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