SDGs के मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, पर्यावरणीय लेखांकन व जेंडर सांख्यिकी पर 2 दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की क्षमता निर्माण कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

पटना : पटना में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, पर्यावरणीय लेखांकन एवं जेंडर सांख्यिकी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की क्षमता निर्माण कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI), भारत सरकार द्वारा और योजना एवं विकास विभाग बिहार सरकार के सहयोग से किया गया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) का तकनीकी सहयोग प्राप्त है।

यह कार्यशाला बिहार में पहली बार आयोजित की जा रही है

यह कार्यशाला बिहार में पहली बार आयोजित की जा रही है, जो राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के लगभग 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिससे राज्यों के बीच ज्ञान साझेदारी, अनुभवों के आदान-प्रदान व सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार को बढ़ावा मिल रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य एसडीजी मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क को सुदृढ़ करना, इंडिकेटर-आधारित प्रगति की प्रभावी ट्रैकिंग सुनिश्चित करना व राज्यों की सांख्यिकीय क्षमता को सशक्त बनाना है। इसके अंतर्गत विशेष रूप से डेटा गैप्स की पहचान, डेटा गुणवत्ता में सुधार, प्रशासनिक एवं सर्वेक्षण आधारित आंकड़ों के एकीकरण पर बल दिया जा रहा है, ताकि नीति निर्माण के लिए विश्वसनीय एवं अद्यतन डेटा उपलब्ध हो सके।

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कार्यशाला में SDG लोकलाइजेशन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है

साथ ही कार्यशाला में एसडीजी लोकलाइजेशन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है, जिसके तहत सतत विकास लक्ष्यों को राज्य, जिला एवं स्थानीय स्तर की योजनाओं के साथ समन्वित किया जा रहा है, ताकि विकास अधिक लक्षित, समावेशी एवं क्षेत्र-विशिष्ट हो सके। कार्यक्रम में पर्यावरणीय लेखांकन को भी प्रमुखता दी जा रही है, जिसके माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, संरक्षण एवं पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन कर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सटीक, विश्वसनीय एवं समयबद्ध आंकड़े अत्यंत आवश्यक हैं – मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव

इसी क्रम में जेंडर सांख्यिकी को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया, ताकि महिलाओं एवं पुरुषों के बीच असमानताओं को डेटा के माध्यम से बेहतर समझकर लैंगिक-संवेदनशील एवं समावेशी नीतियों का निर्माण किया जा सके। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में निम्नलिखित गणमान्य अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए। योजना एवं विकास विभाग के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सटीक, विश्वसनीय एवं समयबद्ध आंकड़े अत्यंत आवश्यक हैं। यह कार्यशाला डेटा-आधारित शासन को सुदृढ़ करने व नीति निर्माण को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा- गुणवत्तापूर्ण डेटा प्रभावी नीतियों की आधारशिला है

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण डेटा प्रभावी नीतियों की आधारशिला है। SDGs के ‘Leave No One Behind’ सिद्धांत को साकार करने के लिए आवश्यक है कि हम अपने डेटा तंत्र को मजबूत करते हुए विकास को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं। वहीं भारत सरकार के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि एसडीजी इंडिकेटर्स की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली, डेटा गुणवत्ता में सुधार व राज्यों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है। यह कार्यशाला इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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बिहार में SDG लोकलाइजेशन को प्राथमिकता देते हुए जिला स्तर तक निगरानी तंत्र विकसित किया जा रहा है – अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी

योजना एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने कहा कि बिहार में एसडीजी लोकलाइजेशन को प्राथमिकता देते हुए जिला स्तर तक निगरानी तंत्र विकसित किया जा रहा है। डेटा गैप्स की पहचान, जेंडर-संवेदनशील आंकड़ों का विकास तथा पर्यावरणीय लेखांकन को नीति निर्माण में शामिल करना हमारी प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। केंद्रीय सांख्यिकी महानिदेशक एनके संतोषी ने कहा कि सांख्यिकी नीति निर्माण की रीढ़ है। एसडीजी संकेतकों की सटीक ट्रैकिंग के लिए राज्यों की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है।

सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ‘डेटा, साझेदारी और नवाचार’ का समन्वय आवश्यक है – रेजिडेंट प्रतिनिधि डॉ. एंजेला लुसिगी

यूएनडीपी के रेजिडेंट प्रतिनिधि डॉ. एंजेला लुसिगी ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ‘डेटा, साझेदारी और नवाचार’ का समन्वय आवश्यक है। पर्यावरणीय लेखांकन और जेंडर सांख्यिकी जैसे क्षेत्रों में सुदृढ़ डेटा तंत्र से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि विकास समावेशी और न्यायसंगत हो। यूएनडीपी इस दिशा में निरंतर सहयोग प्रदान करता रहेगा। इसके अतिरिक्त एससी मलिक (अपर महानिदेशक, सामाजिक सांख्यिकी, MoSPI) ने एसडीजी इंडिकेटर फ्रेमवर्क, डेटा वैलिडेशन एवं रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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‘भारत में एसडीजी लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी’

कार्यशाला के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में एसडीजी इंडिकेटर ट्रैकिंग, डेटा गुणवत्ता सुधार, पर्यावरणीय लेखांकन, जेंडर सांख्यिकी व राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। इस अवसर पर MoSPI तथा योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार की विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। यह कार्यशाला न केवल राज्यों के बीच सहयोग एवं ज्ञान-साझेदारी को सुदृढ़ करेगी, बल्कि भारत में एसडीजी लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। साथ ही, यह बिहार में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला राज्य की बढ़ती संस्थागत क्षमता एवं डेटा-आधारित शासन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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