Gudiya Devi Jivika Success Story, पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली गुड़िया देवी की जिंदगी पति के निधन के बाद मुश्किलों से घिर गई थी। वर्ष 2010 में उनके पति का निधन हो गया। उस समय उनके चार बच्चे थे और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी के साथ उन्हें सामाजिक उपेक्षा का भी सामना करना पड़ा। गुड़िया देवी बताती हैं कि पति के गुजर जाने के बाद उनके लिए जीवन बिताना बेहद कठिन हो गया था। उस दौर में कई लोग उनसे बात तक नहीं करते थे। परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों को बेहतर जीवन देना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था। ऐसे कठिन समय में जीविका से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत बना। इस पहल से उन्हें सहयोग मिला और अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद जगी।
जीविका से जुड़कर मिला काम शुरू करने का सहारा
गुड़िया देवी के मुताबिक, जीविका से जुड़े लोगों ने उनकी परेशानियों के बारे में जानकारी ली और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी दौरान उन्हें सरस मेला में शामिल होकर अपने उत्पाद बेचने की सलाह मिली। इसके बाद उन्होंने सरस मेला में सुजनी बेचने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों को पहचान मिलने लगी और दूसरे लोगों से भी संपर्क बढ़ा। इस तरह उनके लिए कमाई का एक नया रास्ता खुला। गुड़िया देवी के अनुभव से पता चलता है कि सही मार्गदर्शन, बाजार तक पहुंच और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं सीमित संसाधनों के बावजूद अपना काम शुरू कर सकती हैं।
सरस मेला से मिली पहचान, बढ़ने लगे सुजनी के ऑर्डर
गुड़िया देवी के कारोबार को आगे बढ़ाने में सरस मेला की अहम भूमिका रही। मेले में अपने उत्पाद बेचने से उन्हें नए लोगों से मिलने और अपने काम को पहचान दिलाने का अवसर मिला। अब उनके मुताबिक, कई महिलाएं उनके घर आकर सुजनी का काम मांगती हैं और उनके पास ऑर्डर भी आने लगे हैं। इससे उनके काम का दायरा बढ़ा है और आमदनी में सुधार हुआ है। गुड़िया देवी बताती हैं कि पहले जिस जिंदगी में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता था, अब उसमें खुशी के पल लौटने लगे हैं। उनकी कमाई से बच्चों की देखभाल और परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है।
जीविका से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा आत्मनिर्भरता का अवसर
गुड़िया देवी की कहानी बिहार में ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की उन कोशिशों को सामने लाती है, जिनके जरिए महिलाओं को आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जीविका के माध्यम से महिलाओं को समूहों से जुड़ने, काम शुरू करने और अपने उत्पादों के लिए बाजार तलाशने के अवसर मिलते हैं। सरकारी पहल का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना भी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपने परिवार की आय में योगदान दे सकती हैं।
‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य से महिलाओं को प्रोत्साहन
बिहार सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में जीविका से जुड़ी महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य भी रखा गया है। गुड़िया देवी का अनुभव बताता है कि रोजगार के अवसर और बाजार तक पहुंच मिलने से महिलाओं के जीवन में बदलाव आ सकता है। सुजनी के कारोबार के जरिए उन्होंने कठिन परिस्थितियों से निकलकर अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद बनाई है। उनकी कहानी केवल आमदनी बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक पहचान, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की भी मिसाल है।


















