हजारीबाग जेल घोटाले में बड़ा खुलासा। पूर्व सुपरिटेंडेंट ने 10 कुत्तों की रखवाली के लिए 18 जेलकर्मियों को लगाया। कैदियों की मजदूरी में कटौती के आरोप, जांच शुरू।
Hazaribagh Jail Scam हजारीबाग: के जारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में पूर्व जेल सुपरिटेंडेंट जितेंद्र सिंह के कार्यकाल में हुई अनियमितताओं की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं। सुपरिटेंडेंट द्वारा अपने सरकारी आवास पर दस पालतू कुत्तों की देखरेख के लिए अठारह जेलकर्मियों को तैनात किया गया था। इससे भी हैरानी की बात यह है कि इन कर्मियों की हाजिरी बाकायदा बायोमीट्रिक के माध्यम से दर्ज होती थी, जैसे यह उनकी नियमित जेल ड्यूटी हो।
Hazaribagh Jail Scam
ड्यूटी रोस्टर के रिकॉर्ड जब मुख्यालय पहुंचे तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। जेल आईजी ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए जितेंद्र सिंह को दूसरी बार showcause नोटिस जारी किया है। अब तक सुपरिटेंडेंट आवास पर तैनात सभी कर्मियों को वापस जेल में ड्यूटी पर भेज दिया गया है। जानकारी के अनुसार जितेंद्र सिंह ने 27 नवंबर 2023 को हजारीबाग जेल का कार्यभार संभाला था। उनके कार्यकाल को जमीन घोटाले में बंद विनय सिंह को जेल में अतिरिक्त सुविधाएं देने के आरोपों से भी जोड़ा जा रहा है।
Key Highlights
पूर्व सुपरिटेंडेंट जितेंद्र सिंह के आवास पर 10 कुत्तों की देखभाल में 18 जेलकर्मी लगाए गए
ड्यूटी रोस्टर मुख्यालय पहुंचने पर खुला पूरा मामला, जेल IG ने तुरंत संज्ञान लिया
दैनिक मजदूरी का आधा हिस्सा लेने का आरोप, 150 से अधिक कैदियों की शिकायत
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित, कक्षपाल शंभू साव को गढ़वा जेल भेजा गया
बंदी पारिश्रमिक में अनियमितता और कैदियों की योग्यता विभाजन में पक्षपात के आरोप
Hazaribagh Jail Scam
इधर, कैदियों की मजदूरी से जुड़ा एक और गंभीर आरोप सामने आया है। सजायाफ्ता कैदियों ने शिकायत की है कि मजदूरी की राशि का आधा हिस्सा उनसे वसूला जाता है। करीब 900 सजायाफ्ता कैदियों वाले इस जेल में 150 से अधिक कैदियों ने लिखित रूप से बताया कि उनकी दैनिक मजदूरी का बड़ा हिस्सा कक्षपाल भूतपूर्व सैनिक शंभू साव द्वारा वसूला जाता है। इस मामले की जांच के लिए आईजी जेल ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई है, जिसके अध्यक्ष एआईजी तुषार रंजन हैं। उनके साथ बंदी कल्याण पदाधिकारी और एक प्रोबेशन ऑफिसर भी शामिल किए गए हैं। समिति ने जांच शुरू कर दी है और उसी बीच कक्षपाल शंभू साव को गढ़वा जेल स्थानांतरित कर दिया गया है।
Hazaribagh Jail Scam: बंदी पारिश्रमिक का नियम क्या कहता है?
जेल नियमों के अनुसार सजायाफ्ता कैदियों को उनकी योग्यता के आधार पर काम दिया जाता है और उसी के अनुरूप पारिश्रमिक मिलता है। 2015 के नियम के तहत अकुशल कैदी को 91 रुपए, कुशल को 113 रुपए और अति कुशल को 144 रुपए प्रतिदिन दिया जाता है। मजदूरी का एक तिहाई हिस्सा पीड़ित पक्ष को दिया जाता है। कैदियों ने यह भी आरोप लगाया है कि योग्यता विभाजन में भी मनमानी की जाती है, जिससे उनकी मजदूरी प्रभावित होती है।
हजारीबाग जेल में लगातार सामने आ रहे ये आरोप जेल प्रशासन की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
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