राज्यपाल की आपत्तियों पर विचार करे हेमंत सरकार- बाबूलाल

केंद्र पर फेंका-फेंकी की राजनीति बंद हो

रांची : भाजपा नेता विधायक दल एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आज राज्य की हेमंत सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि स्थानीयता से संबंधित विधेयक के संबंध में राज्यपाल रमेश बैस की आपत्तियों पर गंभीरतापूर्वक विचार करे. मरांडी ने कहा कि यह मामला झारखंड के साढ़े तीन करोड़ जनता के हित से जुड़ा हुआ है. इसलिए इसमें बार-बार राजनीति नहीं होनी चाहिए.

राज्य सरकार को नीति बनाने का पूरा अधिकार

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार झारखंड के बच्चों के हित में झारखंड की धरती पर ही विधिसम्मत निर्णय ले. राज्य सरकार को फेंका फेंकी की राजनीति बंद कर अपने संविधान सम्मत अधिकारों का सदुपयोग करना चाहिए. राज्य सरकार को नीति बनाने का पूरा अधिकार है.

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देश के नामी कानूनविदों को महंगी फीस देकर सलाह लेने से नहीं करे परहेज

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपराधियों को बचाने के लिए, उनके मुकदमों की बहस के लिए वकीलों पर करोड़ों रुपए पानी की तरह खर्च कर रही. और यह मामला तो राज्य के हित से जुड़ा हुआ है. इसलिए इस मामले में देश के नामी कानून विदों, वकीलों को महंगी फीस देकर सलाह लेने से राज्य सरकार को परहेज नहीं करना चाहिए.

राज्यपाल ने स्थानीय नीति विधेयक 2022 राज्य सरकार को लौटाया

बता दें कि रविवार को राज्यपाल रमेश बैस ने 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति से संबंधित विधेयक को राज्य सरकार को वापस लौटा दिया है. उन्होंने विधानसभा के विशेष सत्र में पारित संबंधित विधेयक ‘झारखंड स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा और परिणामी सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य लाभों को ऐसे स्थानीय व्यक्तियों तक विस्तारित करने के लिए विधेयक, 2022’ की पुनर्समीक्षा करने को कहा है.

राज्यपाल : विधेयक की वैधानिकता पर गंभीर प्रश्न

विधेयक लौटाते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार इस विधेयक की वैधानिकता की गंभीरतापूर्वक समीक्षा करे कि यह संविधान के प्रविधानों एवं सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप हो. उनके अनुसार, जब राज्य विधानसभा को यह शक्ति ही प्राप्त नहीं है कि वे ऐसे मामलों में कोई विधेयक पारित नहीं कर सकती है, तो इस विधेयक की वैधानिकता पर गंभीर प्रश्न उठता है.

नियोजन पर कानून बनाने की शक्ति केवल संसद के पास

राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 16(3) का हवाला देते हुए कहा कि मात्र संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विशेष प्रविधान के तहत अनुच्छेद 35 (ए) के अंतर्गत नियोजन के मामले में किसी भी प्रकार की शर्त लगाए. राज्य विधानमंडल को यह शक्ति प्राप्त नहीं है.

राज्यपाल: नियोजन के मामले में सभी नागरिकों को समान अधिकार

विधानसभा के विशेष सत्र में पारित इस विधेयक को राज्यपाल के अनुमोदन और उस पर राष्ट्रपति की सहमति के लिये भेजने के अनुरोध के साथ राजभवन को भेजा गया था. राज्यपाल द्वारा विभिन्न माध्यमों से की गई विधेयक की समीक्षा के क्रम में पाया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 16 में सभी नागरिकों को नियोजन के मामले में समान अधिकार प्राप्त है. सिर्फ संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विशेष प्रावधान के तहत नियोजन के मामले में किसी भी प्रकार की शर्त लगाए.

रिपोर्ट: मदन सिंह

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