हेमंत सोरेन का सख्त रुख: जेएसएससी सीजीएल परीक्षा विवाद में निष्पक्ष जांच के निर्देश, राजस्व संग्रह और मंईयां योजना पर जोर

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) सीजीएल परीक्षा 2023 में उठे विवादों को लेकर पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा से जुड़े मामलों में झारखंड हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए निष्पक्षता से जांच पूरी की जाए और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। जांच के दौरान परीक्षा आयोजन में हुई गड़बड़ियों, शिकायतों और परीक्षा परिणाम के बाद उत्पन्न विवादों को भी शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

राजस्व संग्रह: लक्ष्य पूरा करने का सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व संग्रह का जो लक्ष्य तय किया गया है, उसे हर हाल में पूरा करना होगा। इसके लिए नए स्रोतों की पहचान की जाए और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स कलेक्शन में आ रही बाधाओं को जल्द से जल्द दूर किया जाए।

प्रतियोगिता परीक्षाएं: ऑनलाइन मोड में आयोजित होंगी

राज्य में बड़ी संख्या में भर्ती प्रक्रियाएं चल रही हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रतियोगिता परीक्षाओं में गड़बड़ियों की संभावना खत्म करने के लिए ऑनलाइन मोड में परीक्षा आयोजित की जाए। कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) के माध्यम से परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

मंईयां सम्मान योजना: महिलाओं की सहूलियत प्राथमिकता

28 दिसंबर को नामकुम में आयोजित मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्यभर से आने वाली महिला लाभुकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस योजना के तहत सभी लाभुकों को अब ₹2500 मासिक सम्मान राशि डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में दी जाएगी।

म्यूटेशन में गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज से संबंधित मामलों में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। जमीन विवाद और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से हेराफेरी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। इस मामले में दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और जमीन दलालों पर कार्रवाई की जाए।

झारखंड में लंबित म्यूटेशन के 78,599 मामले

भास्कर द्वारा उठाए गए मुद्दे के अनुसार, राज्य में दाखिल-खारिज के 78,599 मामले लंबित हैं, जिनमें से 10 माह में 4,509 मामले बढ़े हैं। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए अंचल कार्यालयों में सुधार के निर्देश दिए हैं।

झारखंड सरकार के इन कड़े कदमों से राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की उम्मीद है।

Saffrn

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