रांचीः 2024 का लोकसभा चुनाव झारखंड की राजनीति के लिए कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। जहां कई बड़े नेताओं के इस बार साख दांव पर है। वहीं कई निर्दलीय भी पूरे चुनाव अभियान को पूरी तरह बदलने की ताकत रखते हैं जिनमें जयराम महतो गिरिडीह, सरयू राय (या तो खुद उतरेगें या अपनी पार्टी से प्रत्याशी देगें) धनबाद, राजमहल से लोबिन हेम्ब्रम का नाम शामिल है।
चंद्रप्रकाश और मथुरा को कड़ी टक्कर देगें जयराम
जयराम महतो गिरिडीह लोकसभा सीट पर कितना बड़ा फैक्टर है यह आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन उनके दो विरोधी प्रत्याशियों ने चुनाव में उन्हें गंभीरता से लेना शुरु कर दिया है। गिरिडीह के यूथ के बीच जयराम महतो लोकप्रियता से सुदेश महतो काफी प्रभावित है। अबतक सुदेश महतो को गिरीडीह के युवा का नेता माना जाता था लेकिन अब सुदेश महतो यह जनाधार युवाओं के बीच लगातार घटता जा रहा है।
जिसका सीधा लाभ जयराम महतो को मिलता जा रहा है। और यूथ के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। गिरिडीह से इंडी प्रत्याशी मथुरा महतो भी जयराम महतो के प्रभाव को कमतर नहीं आंक रहे हैं और लगातार चुनाव अभियान में लगे हुए हैं। सुदेश महतो और मथुरा महतो ने अब तक जयराम महतो को लेकर कोई भी सार्वजनिक बयान उनकी लोकप्रियता को लेकर नहीं दिया है लेकिन जयराम महतो की गिरिडीह की ताकत को कमतर आंका नहीं जा सकता। गिरिडीह में जयराम का क्या प्रभाव होगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
ढुल्लू महतो का खेल बिगाड़ेगे सरयू
धनबाद में ढुल्लू महतो के खिलाफ सरयू राय लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इस बात की संभावना अभी भी बनी हुई है कि वे धनबाद से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन इंडी गठबंधन की ओर से अनुप सिंह की पत्नी अनुपमा सिंह को टिकट दिये जाने के बाद सरयू राय के धनबाद से लोकसभा लड़ने की संभावना कम दिख रही है। लेकिन सरयू राय अपनी पार्टी की ओर से धनबाद लोकसभा सीट से प्रत्याशी को उतार सकते हैं। आने वाले 22 तारीख को इस बारे में उनके द्वारा इस संबंध में आखिरी निर्णय लिया जाएगा।
ये भी पढ़ें-रिश्ता हुआ शर्मशार, बहु ने सास की पटककर हत्या कर दी, आगे फिर……..
लोबिन हेम्ब्रम ने जेएमएम से बगावत कर राजमहल से विजय हांसदा के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। ताला मरांडी को सीधी टक्कर देने की बाद कह चुके हैं और निर्दलीय रुप से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद वे चुनाव अभियान में लग चुके हैं लेकिन राजमहल की जनता लोबिन के साथ कितनी है यह 4 जून को पता चल जाएगा।
लोकसभा चुनाव के लिए तीनो त्रिमूर्ति अपनी कमर कस चुके हैं। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि ये तीनो त्रिमूर्ति इस चुनाव में क्या असर डालते हैं।