हजारीबाग: हजारीबाग की कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने अपने भाई पर झारखंड टाइगर ग्रुप जैसे उग्रवादी संगठन संचालित करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके भाई का राजनीति से कभी कोई संबंध नहीं रहा और उन्हें अचानक से टारगेट करने की कोशिश की जा रही है।
अंबा प्रसाद ने इस मामले को माइनिंग माफिया और प्रशासन की मिलीभगत का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि हजारीबाग और आसपास के ग्रामीणों को अवैध खनन का विरोध करने पर 307 जैसी गंभीर धाराओं में फंसाया जा रहा है। कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और एसपी व डीजीपी से जवाब तलब किया है।
400 पुलिस और 20 थाना प्रभारी की कार्रवाई पर सवाल
अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि कुछ गरीब ग्रामीणों को पकड़ने के लिए 400 पुलिसकर्मी और 20 थाना प्रभारी लगाए गए, जबकि उनके पास किसी भी तरह का इंजरी रिपोर्ट तक मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि गरीब रैयतों को टॉर्चर कर जेल भेजा गया, जबकि असली खनन माफियाओं पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
‘माइनिंग टेररिज्म’ का आरोप
पूर्व विधायक ने कहा कि झारखंड में खनिज संसाधनों की लूट खुलेआम हो रही है और प्रशासन रैयतों का साथ देने के बजाय माइनिंग कंपनियों और कॉर्पोरेट घरानों का संरक्षण कर रहा है। उन्होंने इसे “माइनिंग टेररिज्म” करार देते हुए चेतावनी दी कि अगर यह रवैया जारी रहा तो वह भ्रष्ट अधिकारियों के कार्यालय का घेराव करेंगी।
संघर्ष जारी रखने का संकल्प
अंबा प्रसाद ने साफ किया कि वह किसी भी जांच या मुकदमे से डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को टारगेट करने के लिए ईडी और अन्य एजेंसियां सक्रिय हैं, जबकि बीजेपी नेताओं को पूरी तरह बचाया जा रहा है। उन्होंने जनता और सिविल सोसाइटी से अपील की कि वे इस लड़ाई को झारखंड की अस्मिता और सम्मान का मुद्दा मानकर एकजुट हों।
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