Highlights
बुधवार को हुई इस घटना में छात्राएं कल्पना दास, रासी दास, पल्लवी प्रमाणिक और नमिता बेसरा को स्कूल की प्रधान शिक्षिका स्नेहलता द्वारा यह कठोर दंड दिया गया। छात्राओं ने बताया कि 160 बार उठक-बैठक करने के बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। सांस फूलने लगी और पूरे शरीर में दर्द होने लगा।
छात्राओं ने सुनाई आपबीती
छात्राओं ने कहा कि जैसे-तैसे वे बुधवार को घर पहुंचीं। रातभर बेचैनी रही और गुरुवार सुबह तक नींद नहीं खुली। दर्द और थकावट के चलते नमिता स्कूल नहीं आ सकी, जबकि तीन अन्य किसी तरह स्कूल पहुंचीं।
अभिभावकों ने जताया विरोध
घटना की जानकारी मिलने के बाद अभिभावक नित्यानंद दास, विजय कृष्ण प्रमाणिक और समीर तंतुबाई स्कूल पहुंचे और शिक्षिका से जवाब मांगा। शिक्षिका ने गलती स्वीकारते हुए भविष्य में ऐसा न दोहराने का भरोसा दिलाया। इसके बाद अभिभावक बच्चियों को लेकर माचा स्थित सीएचसी अस्पताल पहुंचे और उनका प्राथमिक उपचार कराया।
घटना की जानकारी विधायक प्रतिनिधि चंद्रशेखर टुडू को भी दी गई। उन्होंने फोन पर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO) प्रभाकर कुमार को मामले की गंभीरता से अवगत कराया। BEEO ने जांच कराने का आश्वासन दिया है।
तीन दिन पहले भी सामने आई थी ऐसी घटना
गौरतलब है कि तीन दिन पहले पटमदा के ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में भी इसी तरह की घटना घटी थी, जहां 9 छात्राओं को 200 बार उठक-बैठक की सजा दी गई थी। तब 5 छात्राओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरा रोष है। परिजनों का कहना है कि छात्राओं से शारीरिक दंड देकर स्कूल प्रशासन उनकी सेहत से खिलवाड़ कर रहा है।
अब देखने वाली बात यह है कि शिक्षा विभाग इस पर क्या सख्त कार्रवाई करता है।


