रांची: झारखंड की राजधानी रांची में ऑनलाइन पार्टटाइम जॉब के नाम पर 22 वर्षीय युवक आशीष मसीह भुइयां से 3,77,895 रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगी की शुरुआत एक साधारण ऑनलाइन मैसेज से हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह मामला लाखों की चपत में तब्दील हो गया।
पीड़ित ने इस संबंध में साइबर थाना, रांची में प्राथमिकी दर्ज करवाई है। पुलिस इस मामले की जांच टेक्निकल ट्रैकिंग के जरिए कर रही है।
टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा, पहले 200 रुपये का लालच
आशीष को एक मैसेज मिला जिसमें ऑनलाइन पार्टटाइम जॉब का ऑफर दिया गया था। रुचि दिखाने पर उसे टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया। शुरुआती टास्क के तहत होटल को ऑनलाइन रेटिंग देने पर उसे 200 रुपये मिले, जिससे उसे भरोसा हो गया।
पेड़ टास्क और आईडी ब्लॉक का जाल
इसके बाद उसे “पेड़ टास्क” का ऑफर दिया गया। जैसे ही उसने गलती की, उसकी आईडी ब्लॉक कर दी गई और अनब्लॉक करने के लिए 40,000 रुपये की मांग की गई। इसके बाद नए टास्क में भी पैसे मांगे जाते रहे।
अकाउंट में फर्जी राशि दिखाकर कमिशन वसूला गया
एक टास्क के बाद उसकी आईडी में ₹1,68,100 की एंट्री दिखाई गई। जब उसने यह राशि निकालनी चाही तो 30% कमीशन (₹50,430) मांगा गया। भुगतान के बाद आईडी में ₹2,18,530 दिखा, लेकिन निकासी क्रम तय बताकर उसे सिर्फ ₹5,000 दिये गए। ₹1 लाख निकालने की कोशिश में ट्रांजेक्शन फेल हो गया।
आईडी फ्रीज, अनफ्रीज के लिए फिर मांगी राशि
इसके बाद कहा गया कि पहले ₹5,000-₹5,000, फिर ₹1 लाख और फिर बाकी रकम मिलेगी – लेकिन यह जानकारी पहले नहीं दी गई थी। जब आशीष ने प्रक्रिया पर सवाल उठाया, तो उसकी आईडी फ्रीज कर दी गई। अनफ्रीज करने के लिए ₹10,675 और मांगे गए। राशि देने के बाद अकाउंट में ₹3,20,295 दिखाया गया।
वीआईपी आईडी की मांग से हुआ ठगी का एहसास
इसके बाद जब उससे वीआईपी आईडी के नाम पर और पैसा मांगा गया, तब आशीष को ठगी का एहसास हुआ। उसने पैसा देना बंद कर दिया और साइबर थाना जाकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस फिलहाल ठगों के ठिकाने और तकनीकी पहचान की प्रक्रिया में जुटी है।


