हल्दिया से वाराणसी तक अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण तेजी से काम कर रहा, गंगा नदी में ड्रेजिंग का काम जारी
भागलपुर : हल्दिया से वाराणसी तक गंगा को जलमार्ग के रूप में विकसित करने की दिशा में अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण तेज़ी से काम कर रहा है। इसी महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत भागलपुर में गंगा नदी की बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग की जा रही है,नदी की गहराई तीन मीटर तक बढ़ाई जा रही है, जिससे गंगा की धारा करीब चार दशक बाद अपने पुराने रास्ते पर लौटती दिख रही है।
ड्रेजिंग से शहर तक पहुँची गंगा की धार
भागलपुर शहर के माणिक सरकार इलाके में, जहां कभी इस सीजन में हर साल गंगा नाले में तब्दील हो जाया करती थी और पानी से दुर्गंध उठती थी, अब वही गंगा निर्मल और अविरल कल-कल बह रही है। धारा मुड़ कर शहर के किनारे तक आ चुकी है। कहलगांव, बरारी और माणिक सरकार घाट के रास्ते सुल्तानगंज होते हुए आगे बड़े जहाजों के सुरक्षित और सुचारू परिचालन को लेकर रतीपुर बैरिया में ड्रेजिंग का काम लगातार जारी है, लेकिन इस विकास के तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
ड्रेजिंग से कटाव का खतरा, खेती पर खतरे की आशंका
रतीपुर बैरिया में ड्रेजिंग को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध भी देखा जा रहा है, सांसद और विधायक ने कहा है कि इससे गंगा के कटाव का खतरा बढ़ सकता है,उनका दावा है कि करीब 15 पंचायतों के लोगों के घर और खेती इस परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं। वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि जलमार्ग के विकसित होने से पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों, व्यापार और जल परिवहन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
बरारी की तरफ से पुल की ऊंचाई बड़े जहाजों के परिचालन के अनुरूप
प्रशासन के अनुसार नवगछिया के महादेवपुर घाट की ओर विक्रमशिला सेतु के स्लैब और गंगा नदी के बीच की दूरी जहाजों के अनुकूल नहीं है, जबकि बरारी की ओर से पुल की ऊंचाई बड़े जहाजों के संचालन के लिए उपयुक्त है। इसी कारण गंगा की धारा को इसी मार्ग से मोड़कर जलमार्ग तैयार किया जा रहा है, विकास बनाम विस्थापन की इस जंग में अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गंगा का यह नया रास्ता भागलपुर के लिए वरदान बनेगा या नई चुनौती।
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राजीव रंजन की रिपोर्ट
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