Jharia News: “सेवा पूरी, सम्मान अधूरा: होमगार्ड जवानों की विदाई में छलकी सरकारी बेरुखी”

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होमगार्ड (Home Guard) जवानों के विदाई समारोह अक्सर केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि वे उस पीड़ा का मंच बन जाते हैं जिसे जवान वर्षों तक अपने भीतर दबाए रखते हैं। अपर्याप्त सुविधाएं, बेहद कम मानदेय, और सेवानिवृत्ति के बाद भविष्य की अनिश्चितता—ये सभी बातें विदाई के समय छलक कर सामने आ जाती हैं। सम्मान की कमी और विभागीय अधिकारियों का बेरुखा रवैया इस दर्द को और गहरा कर देता है।

झरिया में दो होमगार्ड जवान—देवेंद्र सिंह और तेज नारायण सिंह—के विदाई समारोह में यही तस्वीर देखने को मिली, जहाँ सरकारी व्यवस्था की अनुपस्थिति साफ झलकी। विभाग या सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की औपचारिक विदाई की व्यवस्था नहीं की गई। मजबूर होकर साथी जवानों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर समारोह आयोजित किया और फूलमाला, अंगवस्त्र व सम्मान के साथ अपने साथियों को विदा किया।

होमगार्ड जवानों के साथ सौतेला व्यवहार

विदाई समारोह में जवानों ने एक स्वर में कहा कि होमगार्ड जवानों के साथ वर्षों से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तरह ड्यूटी करने के बावजूद उन्हें न तो समान वेतन मिलता है और न ही पेंशन जैसी बुनियादी सुविधा। सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा का कोई प्रावधान न होना जवानों के लिए सबसे बड़ा दर्द है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस सरकार के लिए ये जवान अपनी जवानी खपा देते हैं, वही सरकार उनके भविष्य को लेकर पूरी तरह उदासीन नजर आती है। न सम्मानजनक विदाई की व्यवस्था, न जीवनभर की सेवा का कोई ठोस प्रतिफल—यह सरकारी संवेदनहीनता का स्पष्ट उदाहरण है। कई बार मजबूर होकर जवानों को विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांगें अनसुनी रह जाती हैं।

जवानों ने मांग की कि जिस तरह बिहार सरकार ने होमगार्ड जवानों को सम्मान और सुविधाएं दी हैं, उसी तर्ज पर झारखंड सरकार भी ठोस नीति बनाए। वर्षों की निष्ठावान सेवा के बाद भी यदि जवान सम्मान और सुरक्षा से वंचित रह जाए, तो यह न केवल एक वर्ग के साथ अन्याय है बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

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