रांचीः झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि को स्वाभिमान दिवस के रूप में मनाया. स्वाभिमान दिवस के अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा के अबुआ दिसुम-अबुआ राइज की परिकल्पना को साकार करने के लिए न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका को उनके जवाबदेही, जिम्मेवारी एवं सेवा संकल्प के प्रति दायित्व का निर्वाह करने का आह्वान किया.

इस क्रम में आंदोलनकारियों ने पुराने विधानसभा मैदान के पास एकत्रित होकर कैलाशपति मिश्रा की प्रतिमा को हटाने के लिए जगन्नाथपुर थाना के समीप त्रिकोणीय स्थल पहुंचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया. इस बीच प्रशासन और आंदोलनकारियों में तीखी नोकझोंक हुई. एडीएम आरएन आलोक के लिखित आश्वासन के बाद कार्यक्रम स्थगित किया.
30 दिनों के अंदर में हटेगा कैलाशपति मिश्रा की प्रतिमा
एडीएम आरएन आलोक ने आंदोलनकारियों को आश्वासन देते हुए कहा कि कैलाशपति की प्रतिमा हटाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के एएलपी नंबर 8519/ 2006 वाद में दिए गए निर्णय के आलोक में विधि सम्मत कार्रवाई की जा रही है. अगले एक माह में विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी. इस अवसर पर हटिया डीएसपी राजा मित्रा सहित स्थानीय पुलिस प्रशासन शामिल थे.
प्रशासन को गुमराह एवं सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर लगाई प्रतिमा
कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक एवं प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड के इज्जत और इतिहास को मिटने नहीं देंगे. कैलाशपति मिश्रा की प्रतिमा अवैध तरीके से शासन प्रशासन को गुमराह करके लगाई गई है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवमानना किया गया है. इसके लिए रांची के सांसद संजय सेठ पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास विधायक सीपी सिंह, मेयर आशा लाकड़ा, डिप्टी मेयर संजय विजयवर्गीय, कैलाशपति मिश्रा स्मारक समिति के डॉ प्रदीप वर्मा, सुबोध कुमार सिंह, नगर निगम और नगर विकास प्रशासक पर हाई कोर्ट में केस किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तक इसकी लड़ाई लड़ी जाएगी.
पुष्कर महतो ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने 125 वर्ष पूर्व 28 जनवरी 1898 ई. में चुटिया स्थित राधाबल्लभ मंदिर में अबुआ दिसुम अबुआ राइज का संकल्प लिया था. संकल्प के साथ ब्रिटिश हुकूमत के खात्मा के लिए उलगुलान किया. भगवान बिरसा मुंडा ने 9 जून 1900 ई. में शहादत दी. भगवान बिरसा मुंडा के शहादत के बाद 1908 में आदिवासी, दलित और पिछड़ों के जमीन- जगह की रक्षार्थ सीएनटी एक्ट लागू बना. लेकिन आज डेढ़ करोड़ आदिवासी, दलित, पिछड़ा विस्थापन के शिकार हो गए हैं, जमीन जगह से बेदखल हो गए हैं, दुनिया की दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर लाचार हैं.
राजी पड़हा केंद्रीय समिति के अध्यक्ष रंजीत उरांव ने कहा कि झारखंड भाषा संस्कृति माय माटी विरासत जिन्हें ज्ञान नहीं वह बाहर से आकर हमारा जनप्रतिनिधि बनते हैं. यह हमारे लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य है. हमें अबुआ दिसुम अबुआ राइज का स्वाभिमान बचाने के लिए एक और उलगुलान करना है. जय आदिवासी केंद्रीय परिषद की अध्यक्ष निरंजना हेरेंज टोप्पो ने कहा कि हमें अपने अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई स्वयं लड़नी होगी.
झारखंड आंदोलनकारी भुवनेश्वर केवट ने कहा कि हमारी साझी विरासत को मिटाने का कुचक्र किया जा रहा है. ऐसे नापाक इरादे वालों को बेदखल करने की जरूरत है. झारखंड आंदोलनकारी रोजलीन तिर्की ने कहा कि हमें अपने झारखंड को बेहतर और समृद्ध बनाने और अस्तित्व की रक्षा के लिए सिनगी दई की तरह संघर्ष करना है.
मौके पर सरोजिनी कच्छप, सीताराम उराव, प्रफुल्ल तत्वा, सुरेश महतो, महेंद्र उरांव, प्रतिमा कुजुर, विक्की पाहन, बुद्धू पाहन, अजीत पाहन, विश्वजीत प्रमाणिक, गोपाल रवानी, संजू उरांव, भुवनेश्वर ठाकुर शनिचर मांझी ,शबनम फातमी अभिषेक साहू, रामनंदन साहू ,छेदी अंसारी ,ताहिर अंसारी, बालकिशन यादव, गौतम बोस बिंदे सोरेन विनोद राम दयानंद राम दिनेश राम महावीर राम लोहरा मनोज श्रीवास्तव, भोला नाथ सिंह अल्फ्रेड आइंद्, रतिया इंदवार, शिबू काली मइती, आनंद सिंह मसकल्याण, भीखराम उरांव, सहित अन्य बड़ी संख्या में झारखंड आंदोलनकारी उपस्थित थे.
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