झारखंड CID ने विदेश भागे अपराधियों को वापस लाने के लिए एक्स्ट्राडिशन सेल सक्रिय किया। प्रिंस खान समेत कई गैंगस्टरों पर कार्रवाई तेज होगी।
Jharkhand CID Extradition Cell रांची: झारखंड में गंभीर अपराध कर विदेश भागने वाले अपराधियों और गैंगस्टरों को वापस लाने के लिए झारखंड सीआईडी ने पहली बार एक्स्ट्राडिशन सेल यानी प्रत्यर्पण यूनिट को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। इसे राज्य की कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा और गेमचेंजर कदम माना जा रहा है।
यह विशेष सेल विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को तेज करेगा और उन्हें प्रत्यर्पण के जरिए वापस झारखंड लाने में अहम भूमिका निभाएगा। कुख्यात अपराधी प्रिंस खान समेत कई गैंगस्टरों पर इस यूनिट की नजर रहेगी।
Key Highlights:
• झारखंड CID ने पहली बार एक्स्ट्राडिशन सेल को सक्रिय किया
• विदेश भागे अपराधियों और गैंगस्टरों की वापसी होगी आसान
• केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और सीबीआई के साथ होगा समन्वय
• रेड कॉर्नर नोटिस, ब्लू कॉर्नर और लुक आउट नोटिस जारी कराने में मदद
• एडीजी CID मनोज कौशिक खुद करेंगे पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग
Jharkhand CID Extradition Cell: कैसे काम करेगा एक्स्ट्राडिशन सेल
यदि किसी जिले में कोई गंभीर अपराध करने के बाद आरोपी विदेश भाग जाता है, तो संबंधित जिले के एसपी उस अपराधी का पूरा विवरण, आपराधिक इतिहास और प्रत्यर्पण का प्रस्ताव झारखंड सीआईडी के एक्स्ट्राडिशन सेल को भेजेंगे।
इसके बाद यह सेल केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, सीबीआई और इंटरपोल जैसी एजेंसियों से समन्वय स्थापित करेगा। जरूरत पड़ने पर रेड कॉर्नर नोटिस, ब्लू कॉर्नर नोटिस और लुक आउट नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
इसके साथ ही अभियुक्त की लोकेशन ट्रैक करने और उसे गिरफ्तार कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क रखा जाएगा।
Jharkhand CID Extradition Cell: केंद्रीय एजेंसियों के साथ मजबूत समन्वय
यह सेल जिला पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वयक की भूमिका निभाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश में छिपे अपराधियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा दिलाई जा सके।
फिलहाल इस सेल में एक डीएसपी (लीगल) और पांच कनीय पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। मनोज कौशिक ने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को इस संबंध में पत्र भेजा है।
पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग स्वयं एडीजी CID स्तर से की जाएगी ताकि कार्रवाई में किसी तरह की देरी न हो।
Jharkhand CID Extradition Cell: पहले भी हो चुका है सफल प्रत्यर्पण
झारखंड पुलिस इससे पहले कुख्यात मयंक सिंह के खिलाफ इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर अजरबैजान से उसका प्रत्यर्पण करा चुकी है। उसे रांची लाने के लिए तत्कालीन एटीएस एसपी ऋषभ झा की टीम विदेश गई थी।
हालांकि उस समय एक्स्ट्राडिशन सेल सक्रिय नहीं था, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया में काफी समय लगा था। अब नई यूनिट के सक्रिय होने से ऐसी कार्रवाई और तेज तथा व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
Jharkhand CID Extradition Cell: क्या है प्रत्यर्पण
प्रत्यर्पण एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी अपराधी को उस देश में वापस भेजा जाता है, जहां उसने अपराध किया हो और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए भाग गया हो।
भारत में यह प्रक्रिया प्रत्यर्पण अधिनियम 1962 के तहत नियंत्रित होती है। यह सीधे तौर पर गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधीन काम करती है। भारत 48 से अधिक देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि के तहत कार्य करता है।
इस व्यवस्था के तहत भगोड़े अपराधियों को वापस लाकर न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दिलाई जाती है।
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