झारखंड हाईकोर्ट ने बरियातू स्थित सेना के कब्जे वाली 4.46 एकड़ जमीन मामले में 2009 का एकलपीठ आदेश रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली।
Jharkhand High Court रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने बरियातू मोरहाबादी स्थित सेना के कब्जे वाली 4.46 एकड़ भूमि के विवाद में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने इस मामले में दायर अपील याचिका को स्वीकार करते हुए वर्ष 2009 में पारित एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े तथ्यों को लेकर गंभीर विवाद मौजूद हैं, जिनका निपटारा रिट याचिका के माध्यम से संभव नहीं है। ऐसे विवादों का समाधान सक्षम सिविल न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए।
Jharkhand High Court:रिट याचिका से नहीं सुलझ सकता भूमि स्वामित्व विवाद
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जब किसी संपत्ति को पहले ही प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अटैच किया जा चुका हो और उस अटैचमेंट की पुष्टि भी हो गई हो, तो ऐसे में रिट के जरिए स्वामित्व का दावा स्वीकार्य नहीं हो सकता। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कार्रवाई और PMLA 2002 की धारा 67 के प्रावधानों पर भी विचार किया।
Key Highlights
झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सेना की अपील याचिका स्वीकार की
वर्ष 2009 का एकलपीठ आदेश किया गया निरस्त
अदालत ने कहा, भूमि विवाद का निपटारा सिविल कोर्ट में होगा
इडी ने जमीन से जुड़े दस्तावेजों को बताया फर्जी
विवादित भूमि 1946 से सेना के कब्जे में
Jharkhand High Court:इडी ने दस्तावेजों को बताया फर्जी
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता जयंत कर्नाड द्वारा पेश किए गए जमीन संबंधी दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। इडी की जांच में दावा किया गया कि स्वामित्व के आधार बने राजस्व अभिलेख और म्यूटेशन रजिस्टर जाली हैं। फॉरेंसिक जांच में भी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है।
Jharkhand High Court:1946 से सेना के कब्जे में है जमीन
उल्लेखनीय है कि मोरहाबादी बरियातू स्थित यह भूमि वर्ष 1946 से सेना के कब्जे में है। मूल मालिक बीएम लक्ष्मण राव थे, जिनके निधन के बाद यह जमीन उनके पुत्र बीएम मुकुंद राव को मिली। मुकुंद राव की 1998 में बिना वसीयत मृत्यु हो गई थी। इसके बाद जयंत कर्नाड ने खुद को उनकी बहन का पुत्र बताते हुए एकमात्र उत्तराधिकारी होने का दावा किया था। इसी आधार पर एकलपीठ ने सेना को जमीन लौटाने का निर्देश दिया था, जिसे अब खंडपीठ ने निरस्त कर दिया है।
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