झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा प्रणव झा को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद झामुमो ने नाराजगी जताई है। दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर विवाद गहरा गया है।
Jharkhand Rajya Sabha Election 2026 रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों को लेकर महागठबंधन के भीतर सियासी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस द्वारा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने कड़ी नाराजगी जताई है। झामुमो ने कांग्रेस के फैसले को एकतरफा करार देते हुए कहा है कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर उसका स्वाभाविक दावा बनता है।
झामुमो नेताओं का कहना है कि राज्य में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार चल रही है और राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंतिम निर्णय गठबंधन के भीतर सामूहिक सहमति से होना चाहिए था। पार्टी ने स्पष्ट किया कि प्रणव झा कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और इस निर्णय से झामुमो की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
Jharkhand Rajya Sabha Election 2026:दिनभर बैठकों का दौर, मुख्यमंत्री ने रद्द किए कार्यक्रम
राज्यसभा चुनाव को लेकर गुरुवार को राजधानी रांची में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने विभागीय कार्यक्रम स्थगित कर पार्टी नेताओं, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ कई दौर की बैठकें कीं।
बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपक बिरुआ, योगेंद्र प्रसाद, हफीजुल हसन, वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी, सांसद नलिन सोरेन, विधायक मथुरा महतो और बसंत सोरेन सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में अधिकांश नेताओं ने दोनों सीटों पर झामुमो के चुनाव लड़ने की वकालत की और अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अधिकृत कर दिया।
Key Highlights
कांग्रेस ने प्रणव झा को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया।
झामुमो ने फैसले को एकतरफा बताते हुए नाराजगी जताई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिनभर नेताओं के साथ बैठकें कीं।
महागठबंधन में राज्यसभा सीटों को लेकर बढ़ा तनाव।
चुनावी गणित में दूसरी वरीयता के वोट अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Jharkhand Rajya Sabha Election 2026:कांग्रेस का दावा, हेमंत सोरेन को विश्वास में लिया गया
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उम्मीदवार चयन से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विश्वास में लिया गया था। पार्टी का दावा है कि गठबंधन में किसी तरह का संकट नहीं है और सभी निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए गए हैं।
हालांकि झामुमो की सार्वजनिक नाराजगी ने महागठबंधन के भीतर मतभेदों की चर्चा को और तेज कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या दोनों दल अंतिम समय में कोई सहमति बना पाएंगे या मुकाबला त्रिकोणीय होगा।
Jharkhand Rajya Sabha Election 2026:समझिए राज्यसभा चुनाव का गणित
झारखंड विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए एक उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता होती है।
- झामुमो के पास 34 विधायक हैं, जिससे उसका एक उम्मीदवार लगभग सुरक्षित माना जा रहा है।
- कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं।
- राजद के 4 और माले के 2 विधायक मिलाकर महागठबंधन के सहयोगी दलों के पास कुल 22 वोट होते हैं।
- भाजपा और उसके सहयोगियों के पास लगभग 24 वोट हैं।
यदि झामुमो, कांग्रेस और भाजपा तीनों अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं तो मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है। ऐसी स्थिति में दूसरी वरीयता के वोट निर्णायक साबित होंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार झामुमो अपने पहले उम्मीदवार की जीत के बाद बचने वाले वोटों का मूल्य दूसरी वरीयता के माध्यम से दूसरे उम्मीदवार को स्थानांतरित कर सकता है। झारखंड में पहले भी 2008 के राज्यसभा चुनाव में दूसरी वरीयता के वोटों ने परिणाम को प्रभावित किया था, जब निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी को इसका लाभ मिला था।
Jharkhand Rajya Sabha Election 2026:भाजपा भी सक्रिय, बढ़ सकती है चुनावी दिलचस्पी
महागठबंधन के भीतर जारी असमंजस के बीच भाजपा ने भी विधायक दल की बैठक बुलाकर अपनी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी चुनावी मुकाबले से पीछे हटने वाली नहीं है।
अब सभी की नजर झामुमो नेतृत्व के अगले कदम और नामांकन प्रक्रिया पर टिकी है। यदि महागठबंधन में सहमति नहीं बनती है तो राज्यसभा चुनाव झारखंड की राजनीति का सबसे दिलचस्प मुकाबला बन सकता है।
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