झारखंड पर्यटन निगम के 10.40 करोड़ घोटाले में ED ने ECIR दर्ज की, फर्जी खाते और मनी ट्रेल की जांच तेज, कई आरोपी रडार पर।
Jharkhand Scam Probe : झारखंड पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (जेटीडीसी) से जुड़े 10.40 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वर्ष 2026 की पहली इंफोर्समेंट केस इनफार्मेशन रिपोर्ट (ECIR 1/2026) दर्ज कर ली है। इस कदम के साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच तेज हो गई है और कई अन्य संदिग्ध भी एजेंसी के रडार पर आ गए हैं।
Jharkhand Scam Probe:ईडी की जांच में कई आरोपी रडार पर
ईडी ने इस मामले में गिरजा प्रसाद सिंह, आलोक कुमार और अमरजीत कुमार को आरोपी बनाया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जेटीडीसी के तत्कालीन लेखापाल सह कैशियर गिरजा प्रसाद सिंह और केनरा बैंक हटिया शाखा के तत्कालीन प्रबंधक अमरजीत कुमार ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।
इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को पीएमएलए कोर्ट में होनी है, जहां ईडी अपनी जांच प्रगति पेश कर सकती है।
Key Highlights:
JTDCL के 10.40 करोड़ घोटाले में ED ने ECIR दर्ज की
फर्जी हस्ताक्षर से बैंक खाता खोलकर की गई हेराफेरी
कई संदिग्ध खातों में रकम ट्रांसफर कर निकाला गया कैश
बैंक अधिकारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत की आशंका
26 मार्च को पीएमएलए कोर्ट में अगली सुनवाई
Jharkhand Scam Probe : फर्जी हस्ताक्षर से खोला गया खाता, करोड़ों की हेराफेरी
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 21 जून 2023 को जालसाजी के जरिए निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर कर केनरा बैंक की हटिया शाखा में फर्जी खाता खोला गया।
इसके बाद 13 अक्टूबर 2023 को इस खाते में 10,40,07,496 रुपये सावधि जमा (FD) के रूप में ट्रांसफर किए गए।
ईडी के अनुसार, रकम को बाद में अलग-अलग संदिग्ध खातों में भेजकर कैश निकासी की गई, जिससे पूरे बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
Jharkhand Scam Probe : मनी ट्रेल और नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही ईडी
जांच में सामने आया है कि रांची और पतरातू की विभिन्न बैंक शाखाओं में अन्य व्यक्तियों के नाम से खाते खोलकर रकम ट्रांसफर की गई। इसके बाद इन खातों से कैश निकासी कर ली गई।
मामले का खुलासा पर्यटन विभाग की सचिव अंजली यादव की आंतरिक जांच में हुआ था, जिसके बाद धुर्वा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। उसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है।
सूत्रों के अनुसार इतनी बड़ी राशि की हेराफेरी बिना बैंक कर्मियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। यही कारण है कि ईडी अब बैंक अधिकारियों, खाताधारकों और बिचौलियों के पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और आगे कई और लोगों से पूछताछ की तैयारी है।
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